वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मनमाने तरीके से विश्वभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को वापस करने के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों ने तैयारी शुरू कर दी है।दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने ट्रंप की आर्थिक नीति का अहम हिस्सा रहे टैरिफ को असंवैधानिक करार देते हुए इसे रद कर दिया था। इस कदम से भारत को भी फायदा होगा।अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी ने शुक्रवार को कोर्ट को बताया कि टैरिफ को वापस करने की प्रक्रिया के लिए 45 दिनों के भीतर एक प्रणाली तैयार की जाएगी।
सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा अधिकारी ब्रैंडन लार्ड की यह घोषणा सरकारी वकीलों द्वारा एक संघीय व्यापार न्यायाधीश से मुलाकात से ठीक पहले आई है। इन वकीलों का उद्देश्य लगभग 330,000 आयातकों को 166 अरब डालर के टैरिफ भुगतान वापस करने के लिए व्यापक समझौता करना है।
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
अधिकारी ने कहा, ''इस नई प्रक्रिया में आयातकों से न्यूनतम जानकारी ही मांगी जाएगी।'' न्यायाधीश ने बुधवार को जारी अपने व्यापक आदेश पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई थी, जिसमें उन्होंने निर्देश दिया था कि वह एजेंसी की मौजूदा आंतरिक प्रक्रिया का उपयोग करके संभावित रूप से लाखों आयातकों को टैरिफ वापस करना शुरू करे।
लार्ड ने याचिका में कहा कि सीमा शुल्क एजेंसी आयातकों से अपेक्षा करती है कि वे अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा को टैरिफ भुगतान का विवरण देते हुए एक घोषणा पत्र दाखिल करें, जिसकी पुष्टि के बाद ब्याज सहित धनवापसी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
आयातकों को मुकदमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रत्येक आयातक को वित्त विभाग से एकमुश्त भुगतान प्राप्त होगा, चाहे आयातक ने माल की कितनी भी अलग-अलग प्रविष्टियां की हों। हालांकि, उनके बयान से यह संकेत मिला है कि बहुत कम आयातकों ने सीबीपी की इलेक्ट्रानिक रिफंड प्रणाली के लिए पंजीकरण कराया था।
उनके अनुसार, 330,000 से अधिक आयातकों में से, जिन्होंने अवैध शुल्क का भुगतान किया था, केवल 21,423 ने ही छह फरवरी को लागू हुई इलेक्ट्रानिक रिफंड प्रणाली के लिए पंजीकरण कराया था।



Comments