इन दिनों आम के पेड़ों पर बौर निकलने लगे हैं. यह समय आम की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दौर में फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है. यदि इस समय पेड़ों की सही देखभाल की जाए तो किसानों को बेहतर उत्पादन मिल सकता है. वहीं थोड़ी सी लापरवाही से फसल को भारी नुकसान भी हो सकता है. इसलिए बौर आने के समय किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बौर का निकलना एक संवेदनशील चरण है, जहां मौसम और कीट दोनों का असर सीधा पैदावार पर पड़ता है.
आम के बागों में कीटों का बढ़ता खतरा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बौर निकलने के साथ ही बागों में कई तरह के शत्रु कीट सक्रिय हो जाते हैं. इनमें आम का ‘हॉपर’ ( Hopper Pest), मिलीबग और थ्रिप्स जैसे कीट प्रमुख हैं. ये कीट बौर और कोमल फूलों का रस चूसकर उन्हें सुखा देते हैं, जिससे फल बनने की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो जाती है. कई बार इन कीटों के प्रकोप से बौर काले पड़कर गिर जाते हैं और उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है. इसलिए किसानों को समय रहते इन कीटों की पहचान कर उनके नियंत्रण के उपाय सुनिश्चित करने चाहिए.
बागों की साफ-सफाई भी बेहद जरूरी
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बौर आने के समय बागों की नियमित निगरानी करना सबसे जरूरी कदम है. किसानों को पेड़ों की जांच बारीकी से करनी चाहिए और यदि कहीं भी कीटों का प्रकोप दिखाई दे, तो तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. इसके साथ ही बागों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. सूखी और रोगग्रस्त टहनियों की समय पर छंटाई करने से कीटों को छिपने की जगह नहीं मिलती. बाग में गिरी पुरानी पत्तियों और खरपतवार को हटाना भी बेहद जरूरी है ताकि कीटों का प्रजनन चक्र टूट सके.
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वैज्ञानिक सलाह और कीटनाशकों का उपयोग
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बागों में कीटों की संख्या अधिक दिखाई दे, तो किसानों को वैज्ञानिक सलाह के अनुसार कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए. सही समय और निर्धारित मात्रा में दवाओं का उपयोग करना ही सबसे प्रभावी तरीका है. इसके साथ ही जैविक उपायों को अपनाना भी काफी लाभदायक माना जाता है, क्योंकि इससे फसल सुरक्षित रहती है और पर्यावरण पर भी बुरा प्रभाव नहीं पड़ता. किसानों को सलाह दी गई है कि वे बिना विशेषज्ञ की राय के किसी भी रसायन का अंधाधुंध प्रयोग न करें.
कृषि अधिकारियों का सुझाव
डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर संतोष कुमार ने बताया कि यदि किसान बौर निकलने के समय वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, तो आम की फसल को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है. समय पर निगरानी, छंटाई और सही दवाओं के उपयोग से कीटों का प्रकोप कम होता है और पैदावार में सुधार होता है. इससे न केवल फलों की गुणवत्ता बढ़ती है, बल्कि किसानों को बाजार में अच्छे दाम और बेहतर आमदनी भी मिल सकती है. वर्तमान समय में बागों की गहन देखभाल ही सुनहरे मुनाफे की कुंजी है.



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