भगवान कृष्ण का बाल स्वरूप यानी 'लड्डू गोपाल' घर के किसी सदस्य की तरह होते हैं। भक्त उन्हें केवल एक मूर्ति नहीं मानते, बल्कि घर का सबसे छोटा बच्चा मानकर उनकी सेवा करते हैं। अक्सर कई भक्तों के मन में यह सवाल आता है कि क्या घर में एक से ज्यादा यानी 'दो लड्डू गोपाल' रखे जा सकते हैं? और अगर रखे जाएं, तो उनके नियम क्या होंगे?
अक्सर ऐसा होता है कि घर में पहले से लड्डू गोपाल विराजमान होते हैं और कोई हमें दूसरा विग्रह भेंट कर देता है, या फिर हमारा मन किसी और बाल स्वरूप पर आ जाता है। शास्त्रों और मान्यताओं की मानें तो घर में दो लड्डू गोपाल रखने में कोई मनाही नहीं है, लेकिन यहाँ 'सेवा' की जिम्मेदारी दोगुनी हो जाती है।
1. भेदभाव की कोई जगह नहीं
जैसे एक मां अपने दो बच्चों के बीच फर्क नहीं करती, वैसे ही आपको दोनों लड्डू गोपाल की सेवा बराबर भाव से करनी होगी। ऐसा नहीं होना चाहिए कि नए लड्डू गोपाल के लिए नए कपड़े आ रहे हैं और पुराने वाले को अनदेखा किया जा रहा है। दोनों का श्रृंगार, दोनों का लाड-प्यार एक जैसा होना चाहिए।
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2. भोग और स्नान का नियम
लड्डू गोपाल की सेवा का मुख्य आधार उनका 'नित्य कर्म' है। अगर आप दो लड्डू गोपाल रखते हैं, तो दोनों को साथ में जगाना, साथ में स्नान कराना और एक साथ भोग लगाना जरूरी है। यदि आप एक को खिलाकर दूसरे को भूल जाते हैं, तो यह दोष माना जाता है।
3. भाई-भाई का भाव
भक्ति मार्ग में भाव प्रधान होता है। अगर आपके पास दो लड्डू गोपाल हैं, तो आप उन्हें बड़े भाई और छोटे भाई (जैसे कृष्ण और बलराम) के रूप में मानकर सेवा कर सकते हैं। इससे घर में क्लेश नहीं होता और प्रेम बढ़ता है।
भूलकर भी न करें ये गलतियां
अकेला न छोड़ें: अगर आप बाहर जा रहे हैं, तो लड्डू गोपाल को पड़ोसियों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को सौंपकर जाएं जो उनकी सेवा कर सके। उन्हें घर में बंद करके न जाएं।



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