वरिष्ठ गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रन सिंह परमार का निधन, देशभर में शोक की लहर

वरिष्ठ गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रन सिंह परमार का निधन, देशभर में शोक की लहर

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद : वरिष्ट गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता, एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सामाजिक आंदोलनों के प्रमुख नेता डॉ. रन सिंह परमार (72) का शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के तिल्दा में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, गांधीवादी संगठनों और जन आंदोलनों से जुड़े लोगों में गहरा शोक व्याप्त है।प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ. परमार तिल्दा में प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक राजगोपाल पी.वी. तथा एकता परिषद के वरिष्ठ साथियों के साथ आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उनका आकस्मिक निधन हो गया।

डॉ. रन सिंह परमार लंबे समय से सामाजिक सरोकारों और जन आंदोलनों से जुड़े हुए थे। वे नेशनल यूथ प्रोजेक्ट के राष्ट्रीय महासचिव, महात्मा गांधी सेवा आश्रम जौरा के सचिव तथा भोपाल स्थित गांधी भवन के ट्रस्टी भी रहे। उन्होंने लगभग पांच दशकों तक वंचित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों के लिए सक्रिय संघर्ष किया। जल, जंगल और जमीन पर समुदाय के अधिकारों को लेकर उन्होंने देशभर में कई जन आंदोलनों का नेतृत्व किया और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने के लिए निरंतर काम किया।

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डॉ. परमार युवावस्था से ही विख्यात गांधीवादी नेता डॉ. एस.एन. सुब्बाराव से प्रभावित होकर उनके साथ जुड़ गए थे। उनके मार्गदर्शन में उन्होंने कई सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। मुरैना में जन्मे डॉ. परमार ने चंबल क्षेत्र में बागियों के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसे सामाजिक समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जाता है।एकता परिषद के बैनर तले आयोजित कई राष्ट्रीय पदयात्राओं और जन आंदोलनों में डॉ. परमार अग्रिम पंक्ति में रहे। उन्होंने ग्रामीण और वंचित समुदायों के अधिकारों की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम योगदान दिया। गांधीवादी विचारधारा, अहिंसा और सामाजिक न्याय के प्रति उनका समर्पण उन्हें सामाजिक आंदोलन की दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाता रहा।

डॉ. परमार के निधन पर देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, राजनेताओं तथा विभिन्न संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि उनके निधन से सामाजिक आंदोलनों को अपूरणीय क्षति हुई है और गांधीवादी विचारधारा के एक समर्पित सिपाही को देश ने खो दिया है।बताया गया है कि तिल्दा से शुक्रवार रात करीब 12 बजे उनके पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से महात्मा गांधी सेवा आश्रम के ग्वालियर संसाधन केंद्र, पुरानी छावनी थाना के पास लाया जाएगा। वहां शनिवार सुबह 11 बजे श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव मृगपुरा, जिला मुरैना ले जाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।डॉ. रन सिंह परमार के निधन से गरियाबंद जिले के सामाजिक आंदोलन और गांधीवादी संगठनों में शोक की लहर है तथा देशभर में उनके योगदान को याद किया जा रहा है।









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