हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र प्रतिपदा से, जानें इसकी मान्यताएं और परंपराएं

हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र प्रतिपदा से, जानें इसकी मान्यताएं और परंपराएं

भारतीय कालगणना का प्रारंभ विधाता की सृष्टि-रचना के प्रथम दिवस से होता है। सृष्टि का यही प्रथम दिवस युगादि कहा जाता है। भारतीय संवत्सर के प्रथम दिवस के रूप में इसकी प्रतिष्ठा है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस तिथि को महत्त्व देते हुए ब्रह्माजी ने प्रथम स्थान पर रखा, अतः इसका नाम ‘प्रतिपदा’ हुआ।

प्रतिपदा का महत्त्व सर्वाधिक है। यह लोकपितामह ब्रह्मा के सृष्टि-विधान की पहली तिथि होने से मांगलिक है। इस प्रतिपदा के पुण्य-प्रभाव को देखते हुए अनेक धार्मिक कृत्यों का निर्देश किया गया है। उदयकालिक प्रतिपदा को तेल लगाकर स्नान करना, ब्रह्माजी की, वर्ष के स्वामी की, दक्ष-कन्याओं की, तथा पल से युग पर्यंत समय की पूजा करने का निर्देश वर्ष प्रतिपदा पर उपलब्ध होता है।

उत्सव करने की परंपरा

नवीन ध्वजारोहण, तोरण-पताकाओं आदि की सजावट तथा धूमधाम से उत्सव करने की परंपरा भी नववर्ष की इस तिथि पर प्रचलित है। संवत्सर शब्द का अर्थ बताते हुए कहा गया है कि जिसमें ऋतुएं निवास करती हैं। इस दृष्टि से देखने पर वर्ष प्रतिपदा वर्ष की पहली ऋतु के प्रथम मास के प्रथम पक्ष की पहली तिथि है।

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प्रथम ऋतु वसंत का महत्व

यह प्रथम ऋतु वसंत है, जिसे ऋतुराज कहा जाता है। चैत्र एवं वैशाख मास जिन्हें क्रमशः मधु तथा माधव मास कहा जाता है, ऋतु के महीने हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष के रूप में देश भर में भिन्न-भिन्न नामों से मनाया जाता है। दक्षिण के राज्यों कर्नाटक, तेलंगाना, आन्ध्रप्रदेश आदि में उगादि अथवा युगादि (युग का आदि) के रूप में वर्ष प्रतिपदा प्रसिद्ध है।महाराष्ट्र और गोवा में इसका रूप गुडी पड़वा है, गुडी अर्थात पताका और पड़वा अर्थात प्रतिपदा कहलाता है। सिंधी समाज में चेटीचंड (चैती चन्द्र) चैत्र के चंद्रमा के प्रथम दर्शन के रूप में प्रचलित है।

पहली प्रतिपदा केवल नववर्ष नहीं

वसंत की मधुमयी प्रकृति, स्नेहार्द्र वृक्ष-वनस्पति समुदाय, शीत के कोप से मुक्त होता परिवेश और समृद्ध होती धरती के कारण चैत्र मास भारतीय अवधारणा में ‘श्रीमान्’ मास कहलाता है। इसकी पहली प्रतिपदा केवल नववर्ष ही नहीं, नवजीवन की संभावना लेकर आती है।

धर्मविग्रह श्रीराम के प्राकट्य का महीना बनकर यह चैत्रमास हमारी संस्कृति का आदरणीय मास समझा जाता है। प्रतिपदा से आरंभ नवरात्र पर्व शक्ति सदाचार का अनुष्ठान-पर्व है, जिसकी नवमी पर मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म इसे रामनवमी की संज्ञा प्रदान करता है। वर्ष प्रतिपदा इन सभी दिव्यातओं का एकात्म उत्सव है।









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