शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर देशभर के प्राथमिक शिक्षकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सोमवार को अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने कलेक्ट्रेट सभागार के बाहर एकत्र होकर जोरदार प्रदर्शन किया।
शिक्षकों ने अपनी मांगों के समर्थन में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नाम पोस्टकार्ड भेजकर इस नियम को वापस लेने या इसमें बदलाव करने का अनुरोध किया है।
“नियुक्ति के समय नहीं था कोई TET”
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का मुख्य तर्क है कि जो शिक्षक 25 से 30 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन पर वर्तमान नियमों को थोपना गलत है। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की प्रचलित नियमावली के अनुसार हुई थी, जब टीईटी (TET) जैसी कोई परीक्षा अस्तित्व में ही नहीं थी। ऐसे में अब सेवा के अंतिम पड़ाव पर टीईटी की शर्तों को बाध्यकारी बनाना उनके साथ अन्याय है।
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डाकघर पहुंचकर डाले सैकड़ों पोस्टकार्ड
TET Rule for Old Teachers/कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के बाद सभी शिक्षक मुख्य डाकघर पहुंचे और वहां लगे पोस्ट बॉक्स में अपने मांग पत्र (पोस्टकार्ड) डाले। पोस्टकार्ड के जरिए शिक्षकों ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से अपील की है कि RTE कानून लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे।
प्रदर्शन में ये शिक्षक रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन और पोस्टकार्ड अभियान में मुख्य रूप से प्रवीन कुमार फ़ौजी, प्रांतीय/जिला मंत्री वीरपाल सिंह जाटव, बलराम गुप्ता, संजय शर्मा, सौरभ मिश्रा और शिल्पी सहित भारी संख्या में शिक्षक शामिल हुए।
इनके अलावा उमेश प्रताप सिंह दिनकर, इंद्रेश यादव, राम सुन्दर यादव, विजेंद्र प्रताप सिंह, प्रियंवदा, अर्चना पचौरी, आरजू पांडे और साधना झा जैसे कई वरिष्ठ शिक्षकों ने भी इस मुहिम में हिस्सा लिया।



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