समग्र शिक्षा कार्यालय के बाहर व्यावसायिक शिक्षकों का हल्ला बोल, ठेका कंपनियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

समग्र शिक्षा कार्यालय के बाहर व्यावसायिक शिक्षकों का हल्ला बोल, ठेका कंपनियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

रायपुर : राजधानी में समग्र शिक्षा कार्यालय के सामने मंगलवार को ठेका प्रथा के खिलाफ बड़ी संख्या में व्यावसायिक शिक्षकों ने प्रदर्शन किया. उनका कहना है कि किसी ट्रेड में तीन तो किसी ट्रेड में 5 महीने का भुगतान नहीं किया गया. वहीं ठेका कंपनियों को हटाने की कई बार मांग के बावजूद विभाग पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया.

भूपेश कुमार नवीन व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ के अध्यक्ष ने कहा लगातार कंपनियों की मनमानी बढ़ रही है. बार-बार ठेका कम्पनियां प्रशिक्षकों को प्रताड़ित कर रही है. एक एक रुपये के लिए मोहताज कर दिया जाता है. इसीलिए ठेका कंपनी लर्नेट, स्किल ट्री, आइसेक्ट, ग्राम तरंग, लक्ष्य, निटकॉन, अपग्रेट लिमिटेड, इंडस इन कंपनियों को तत्काल हटाकर दूसरी व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना चाहिए. विभाग और ठेका कंपनी के बीच अनुबंध के मुताबिक लगभग छह माह तक कंपनी को प्रशिक्षकों को भुगतान करना है, लेकिन ऐसा नहीं किया जाता. प्रदर्शन करने पर ही भुगतान होता है. इसलिए इन कंपनियों को हटा देना चाहिए. कई बार मांग करने के बावजूद इन कम्पनियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है.

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प्रदर्शन कर रहे व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने बताया कि हर बार यही स्थिति रहती है, कभी चार महीने तो कभी छह महीने का भुगतान नहीं होता. अभी भी यही हालत है. सभी कम्पनियों ने भुगतान नहीं किया है. वह बिना सैलरी के काफी दिक्कतों से जिगंदगी गुजार रहे हैं. बस्तर, सरगुजा तक प्रशिक्षक कार्य कर रहे हैं, ऐसे में 3-4 महीने सैलरी नहीं मिलने से आर्थिक तंगी मानसिक रूप से कमजोर कर रही है. कंपनी और विभाग के बीच प्रशिक्षक बिना वेतन के मजबूरी में कार्य कर रहे हैं. होली के त्यौहार में रंग खरीदने को और अपने घर जाने को प्रशिक्षकों के पास पैसे नहीं थे. ईएमआई देने के लिए प्रशिक्षक उधारी मांगने के लिए मजबूर हैं.

प्रशिक्षकों का कहना है कि विभाग और कंपनी के बीच एमओयू नहीं हुआ है तो बिना वेतन के काम क्यों करवाया जा रहा है. नए प्रशिक्षकों का इंडक्शन ट्रेनिंग और पुराने प्रशिक्षकों का इन-सर्विस ट्रेनिंग भी इस वर्ष हुआ नहीं. भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 1 हजार का इंक्रीमेंट 2025-26 में की गई है, लेकिन अब तक उस पर भी सज्ञान नहीं लिया जा रहा है.









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