माता रानी की कृपा प्राप्ति के लिए कई भक्त चैत्र नवरात्र की पावन अवधि में नौ दिनों तक व्रत करते हैं। यह अवधि देवी के 9 स्वरूपों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अति उत्तम मानी गई है। आप नौ दिनों में देवी के इन 9 मंत्रों का जप कर सकते हैं।
1. मां शैलपुत्री
चैत्र नवरात्र का प्रथम दिन यानी प्रतिपदा तिथि मां शैलपुत्री को समर्पित है। शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं और स्थिरता का प्रतीक हैं। प्रथम दिन यदि आप इस मंत्र का जप करते हैं, तो इससे आपकी वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर हो सकती हैं।
मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
2. मां ब्रह्मचारिणी
नवरात्र के दूसरे दिन ज्ञान और तपस्या की देवी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन यदि आप मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित इस मंत्र का जप करते हैं, तो इससे आपको ज्ञान, आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
3. मां चंद्रघंटा
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। इन्हें शांति, साहस और शक्ति की देवी के रूप में पूजा जाता है। अगर आप नवराभ के तीसरे दिन इस मंत्र का जप करते हैं तो इससे आपको बौद्धिक क्षमता का विकास और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
4. मां कुष्मांडा
चैत्र नवरात्र का चौथा दिन ब्रह्मांड की रचना करने वाली मां कुष्मांडा को समर्पित है। इन दिन पर इस दिव्य मंत्र का जप करने से आपको आरोग्य स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।
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मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ कुष्मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
5. मां स्कंदमाता
पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा होती है। भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। यदि आप संतान सुख की प्राप्ति और ममता का आशीष चाहते हैं, तो नवराभ के पांचवें दिन इस मंत्र का जप करें।
मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
6. मां कात्यायनी
नवरात्र का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित है। महिषासुर का वध करने वाली मां कात्यायनी शत्रुओं पर विजय दिलाती हैं। इस दिन यदि आप इस दिव्य मंत्र का जप करते हैं, तो इससे कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और शत्रुओं का नाश होता है।
मंत्र: कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।
7. मां कालरात्रि
नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। मां कालरात्रि अंधकार का नाश करने वाली हैं। ऐसे में यदि आप इस दिन पर माता के इस मंत्र का जप करते हैं, तो इससे आपको अकाल मृत्यु के भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिल सकती है।
मंत्र: ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।।
8. मां महागौरी
नवरात्र का आठवां दिन मां महागौरी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। देवी का यह स्वरूप पवित्रता और शांति की प्रतीक है। इस दिन मां महागौरी के मंत्र का जप करने से ग्रह दोषों से मुक्ति और रोगों का निवारण होता है।
मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
9. मां सिद्धिदात्री
नवरात्र के नौवें यानी आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाली हैं। ऐसे में यदि आप मोक्ष, पूर्णता और आध्यात्मिक सिद्धियों की प्राप्ति चाहते हैं, तो इस मंत्र का जप करें।
मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।



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