नई दिल्ली: दशकों से पाकिस्तान अफगान तालिबान का सबसे करीबी मित्र रहा है। यह पाकिस्तान ही है, जिसने बीती सदी के आखिरी दशक में तालिबान के उदय में मदद की थी। उसने भारत के साथ दुश्मनी में बढ़त पाने की रणनीति के तहत यह कदम उठाया था, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि दोनों की दशकों पुरानी गहरी दोस्ती अब दुश्मनी में बदल गई।
तालिबान के शासन में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नाम पर लगातार हमले कर रहा है। तालिबान भी पलटवार कर रहा है और उसे मुंहतोड़ जवाब दे रहा है।दोनों पड़ोसी देशों के बीच हालिया हफ्तों में कई बार संघर्ष हो चुका है। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने सोमवार रात काबुल में हवाई हमला किया, जिसमें 400 से ज्यादा लोग मारे गए।
पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने सैन्य प्रतिष्ठानों और आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने पिछले महीने दोनों पड़ोसी देशों के बीच बढ़ते तनाव को खुला युद्ध करार दिया था। 22 फरवरी को अफगानिस्तान में कई जगहों पर हवाई हमले किए थे।
इस महीने भी अफगानिस्तान के कई प्रमुख शहरों पर हवाई हमले किए गए। अक्टूबर में दोनों के बीच सीमा पर झड़प हुई थी, जिसमें कई सैनिक मारे गए थे। बाद में तुर्किये, कतर और सऊदी अरब की मध्यस्थता से संघर्ष विराम हुआ था।
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क्यों लड़ रहे दोनों पड़ोसी देश?
2021 में तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था। तब पाकिस्तान ने इसका स्वागत किया था। हालांकि इस्लामाबाद को जल्द एहसास हुआ कि तालिबान उतने सहयोगी नहीं हैं, जितना उसने उम्मीद की थी।
पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के प्रमुख आतंकी अफगानिस्तान में हैं और बलूचिस्तान के लिए स्वतंत्रता की मांग करने वाले विद्रोहियों के लिए भी वह सुरक्षित ठिकाना बन गया है। लेकिन काबुल इससे इनकार करता रहा है।
कैसे हुई हालिया संघर्षों की शुरुआत?
गत फरवरी में हवाई हमलों से पहले पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके पास ठोस सुबूत हैं कि हालिया आत्मघाती हमलों के पीछे अफगानिस्तान में रहने वाले आतंकी हैं। वे पाकिस्तानी सेना और पुलिस को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने 2024 के आखिर से हुए सात बड़े आतंकी हमलों को अफगानिस्तान से जोड़ा।
कौन है पाकिस्तान तालिबान?
टीटीपी को पाकिस्तान तालिबान भी कहा जाता है। 2007 में गठित यह आतंकी संगठन पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम हिस्से में सक्रिय है। उसकी अफगान सीमा के साथ लगते इलाकों और पाकिस्तान में अन्य जगहों तक पैठ है। उसने कई बाजारों, मस्जिदों, एयरपोर्ट, सैन्य ठिकानों और पुलिस स्टेशनों पर हमले किए हैं। टीटीपी 2012 में मलाला यूसुफजई पर हुए हमले में भी शामिल था। मलाला को बाद में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।



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