आज के दौर में जहां डिग्री हाथ में लेकर युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं, वहीं झारखंड के एक ‘अनपढ़’ किसान ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो मिट्टी भी सोना उगल सकती है. लोहरदगा के रहने वाले बिलेंद्र साहू ने अपनी लगन से न केवल खुद को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया, बल्कि खेती को एक मुनाफे वाले व्यवसाय के रूप में स्थापित कर मिसाल पेश की है.
बिलेंद्र साहू मूल रूप से लोहरदगा जिले के मसमानो गांव के निवासी हैं. बचपन में पिता के दिव्यांग होने के कारण घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई, जिसके चलते वे स्कूल नहीं जा सके. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय कुदाल थामी और खेतों में पसीना बहाना शुरू किया.
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करीब 20 साल पहले एक दोस्त की सलाह पर वे गुमला आए और टोटाम्बी इलाके में छोटे स्तर से खेती शुरू की. आज वे गुमला के खरका और सांवरिया जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 20 एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं.
बिलेंद्र की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे वर्तमान में 12 एकड़ में सिर्फ मटर की खेती कर रहे हैं. इसके अलावा उनके खेतों में पत्तागोभी, मूली, सरसों और अरहर की फसलें लहलहा रही हैं.
उन्होंने बताया कि खेती एक जोखिम भरा काम जरूर है, लेकिन सही अनुभव और कड़ी मेहनत से इसमें मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है. इसी खेती की बदौलत उन्होंने न केवल जमीन खरीदी और पक्का मकान बनवाया, बल्कि अपने 5 बच्चों को उच्च शिक्षा भी दिलाई. गर्व की बात यह है कि उनके दो बच्चे आज सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं.



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