अचानक बारिश और ओलावृष्टि से सहकारी समितियां संकट में, खुले में रखा धान भीगने के खतरे में

अचानक बारिश और ओलावृष्टि से सहकारी समितियां संकट में, खुले में रखा धान भीगने के खतरे में

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद/छुरा :  जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने सहकारी समितियों की चिंता बढ़ा दी है। तेज बारिश, ओलावृष्टि और आंधी ने उन समितियों की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां समर्थन मूल्य पर खरीदा गया धान अब भी खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है।जानकारी के अनुसार, जिले की विभिन्न सहकारी समितियों में बड़ी मात्रा में धान का भंडारण किया गया है, लेकिन परिवहन कार्य अभी भी जारी है। इस बीच अचानक हुई बारिश ने धान की सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। कई जगहों पर धान को बचाने के लिए समिति प्रबंधकों और कर्मचारियों को तत्काल तिरपाल से ढंकने की व्यवस्था करनी पड़ी, लेकिन तेज हवा और लगातार बारिश के चलते यह प्रयास पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पा रहा है।समिति प्रबंधकों का कहना है कि धान के परिवहन में अभी लगभग एक सप्ताह का समय और लगेगा।

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ऐसे में यदि मौसम इसी तरह खराब बना रहा, तो धान के भीगने और खराब होने की आशंका बढ़ सकती है, जिससे शासन को नुकसान उठाना पड़ सकता है।सिवनी समिति के प्रबंधक चरन ठाकुर ने बताया कि मौसम की अनिश्चितता के चलते लगातार निगरानी रखी जा रही है, लेकिन खुले में रखे धान को पूरी तरह सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने बताया कि विभाग को भी स्थिति से अवगत कराया गया है और जल्द से जल्द परिवहन कार्य पूर्ण कराने की मांग की जा रही है।इधर, मौसम विभाग द्वारा आने वाले दिनों में और बारिश की संभावना जताए जाने से समिति प्रबंधन के साथ-साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस स्थिति से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है, ताकि किसानों की मेहनत पर पानी न फिर जाए।









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