नई दिल्ली : एक ऐसा अपराध जिसके खिलाफ भारत की न्याय व्यवस्था में भी कोई कानून नहीं है- मैरिटल रेप । क्य शादी के बाद स्त्री की ना के कोई मायने नहीं? क्या एक शादी पुरुष को स्त्री के साथ किसी भी तरह की ज्यादती का हक दे देती है? ऐसे गंभीर और जरूरी सवालों के जवाब ढूंढती है वेब सीरीज चिरैया ।
जियो हॉटस्टार (Jio Hotstar) पर स्ट्रीम हो रही चिरैया में मैरिटल रेप जैसे गंभीर मुद्दे को उठाकर समाज में अपनी जड़ें गहराई तक जमाकर बैठी पितृसत्ता पर सीधा वार किया जाता है। आइए जानते हैं कैसी है वेब सीरीज चिरैया (Chiraiya)।
क्या है चिरैया की कहानी?
कहानी का केंद्र कमलेश (दिव्या दत्ता) है, जो लखनऊ के एक संभ्रांत परिवार में रहने वाली एक पारंपरिक और संस्कारी बहू है। इस परिवार की बागडोर उसके ससुर (संजय मिश्रा) के हाथों में है। कमलेश को परिवार की परंपराओं को निभाने पर गर्व है, और वह इसके लिए कुछ पितृसत्तात्मक (Patriarchy) नियमों को भी नजरअंदाज कर देती है। इसके साथ ही उसे अपने देवर पर काफी नाज है जिसे वह अपने बेटे की तरह प्यार करती है। इतना ही नहीं उसे विश्वास है कि वह कुछ गलत नहीं कर सकता।
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कहानी में एक मोड़ तब आता है, जब देवर की शादी हो जाती है और शादी के बाद उसकी बहू पूजा (प्रसन्ना बिष्ट)—जो अभी-अभी शादी करके आई है। यह खुलासा करती है कि शादी की पहली रात से ही उसका पति अरुण (सिद्धार्थ शॉ) उसके साथ यौन शोषण और उसकी मर्जी के बिना जबरदस्ती फिजिकली रिलेशन बना रहा है।
पहले तो कमलेश इसे झूटला देती है लेकिन जब सच सामने आता है तो उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है और फिर वह अपने देवर को सजा दिलाने की ठान लेती है। लेकिन क्या कमलेश, पूजा को वह न्याय दिला पाती है जिसके लिए कोई कानून ही नहीं बना? यह तो सीरीज के देखकर ही पता चलेगा।
चिरैया वेब सीरीज रिव्यू
शशांत शाह द्वारा निर्देशित यह सीरीज मैरिटल रेप जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को उठाने की एक शानदार कोशिश है। इसके साथ ही सीरीज में पितृसत्ता पर भी जोरदार वार किया गया है। इनके साथ ही बेटों की परवरिश में परिवार की भूमिका, औरतों का औरतों के ही खिलाफ होना, बेटा-बेटी में भेद करना और होमोसेक्सुएलिटी जैसे मुद्दों को भी सीरीज में सहजता से उठाया गया है।
इसके साथ ही सीरीज का मैसेज भी काफी मजबूत और सोचने पर मजबूर करने वाला है। घर की बहू और एक जेठानी के रूप में दिव्या दत्ता ने शानदार काम किया है। परिवार के मुखिया के रूप में संजय मिश्रा ने अच्छा काम किया है और बाकी कलाकारों ने भी अपने किरदार अच्छे से निभाए हैं।
कहां है कमी?
इतने मजबूत मु्द्दों को उठाकर भी सीरीज आखिर में अपराधियों को पूरी तरह से सोचने पर मजबूर नहीं करती। यानी मैरिटल रेप और पितृसत्ता के खिलाफ उठी यह जंग महिलाओं से शुरू होती है और वहीं खत्म हो जाती है। आखिर में अपराधी और घर के बाकी पुरुषों पर इसका कोई खास असर और रिएक्शन नहीं दिखता।
इसके साथ ही 6 एपिसोड में यह कहानी छोड़ी खींची हुई लगती है। यदि 2 घंटे की मूवी भी होती तो कहानी अच्छे से कही जा सकती थी। क्लाईमैक्स बेहतर हो सकता था।
देखें या नहीं?
समाज के बड़े मुद्दों को उठाती यह सीरीज जियो हॉटस्टार पर मस्ट वॉच है-एक बार जरूर देखें, क्योंकि यह आपको सोचने और सवाल उठाने पर मजबूर करती है।



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