न्यायधानी की हकीकत: मेघदूत नगर में कचरे की आग से दो कारें राख, व्यवस्था कटघरे में

न्यायधानी की हकीकत: मेघदूत नगर में कचरे की आग से दो कारें राख, व्यवस्था कटघरे में

बिलासपुर : न्यायधानी में विकास के दावे जितनी तेजी से किए जा रहे हैं, जमीनी हकीकत उतनी ही भयावह तस्वीर पेश कर रही है। मेघदूत नगर में कचरे के ढेर में लगी आग ने दो कारों को जलाकर खाक कर दिया, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल उस व्यवस्था पर खड़ा हो गया है, जो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद बुनियादी सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं कर पा रही।

शनिवार दोपहर सरकंडा क्षेत्र के मेघदूत नगर में कॉलोनी के सामने डंप कचरे के ढेर में अचानक आग भड़क उठी। आग इतनी तेजी से फैली कि पास में खड़ी दो कारें चपेट में आ गईं और कुछ ही देर में पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। स्थानीय लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटों ने किसी को संभलने का मौका नहीं दिया।

 गली में अटकी फायर ब्रिगेड, जलती रही गाड़ियां

घटना की सूचना पर फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची, लेकिन कॉलोनी की संकरी गलियों ने राहत कार्य को भी बेबस कर दिया। वाहन अंदर तक पहुंच ही नहीं सका और मुख्य सड़क पर खड़े होकर पाइप के जरिए आग बुझानी पड़ी। जब तक पानी पहुंचता, तब तक दोनों कारें पूरी तरह जल चुकी थीं। यह स्थिति सीधे तौर पर शहर की प्लानिंग और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की पोल खोलती है।

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 सफाई दावे, जमीन पर कचरे के ढेर

जिस शहर में सफाई और कचरा प्रबंधन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हों, वहां खुले मैदान में कचरे का ढेर और उसमें लगने वाली आग व्यवस्था की सच्चाई बयान करती है। सवाल यह उठता है कि यदि नियमित कचरा उठाव और मॉनिटरिंग हो रही होती, तो क्या इस तरह की घटना सामने आती?

 निकला इंसान, अब कचरे में जल रही संपत्ति

शहर में हाल के दिनों में अजीब और चिंताजनक घटनाएं सामने आई हैं। कुछ समय पहले जमीन के भीतर से एक व्यक्ति के निकलने का मामला सुर्खियों में रहा और अब कचरे के ढेर में लगी आग से संपत्ति जलने की घटना ने लोगों को असमंजस में डाल दिया है कि आखिर शहर किस दिशा में बढ़ रहा है।

जिम्मेदार कौन? निगम या तंत्र की चूक

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या निगम प्रशासन के पास सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए पर्याप्त तंत्र नहीं है, या फिर मौजूद तंत्र केवल कागजों तक सीमित है? यदि व्यवस्था मौजूद है, तो इस घटना तक स्थिति कैसे पहुंची?

 विकास के दावे बनाम जमीनी सच्चाई

यह घटना सिर्फ दो कारों के जलने की नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम की परत खोलती है, जहां दावे और हकीकत के बीच खाई लगातार बढ़ती जा रही है। अगर समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं हुई और व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो ऐसी घटनाएं आगे और गंभीर रूप ले सकती हैं।

 









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