कोलकाता:बंगाल विधानसभा चुनावों की रणभेरी बजते ही राज्य की दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियों तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के लिए बाहरी शत्रुओं से ज्यादा घर के 'विभीषण' चुनौती बन गए हैं।टिकट बंटवारे से असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब सड़कों पर पोस्टर, नारेबाजी और सामूहिक इस्तीफे के रूप में फूट रहा है। बांकुड़ा से लेकर हावड़ा तक, दोनों ही दल 'उम्मीदवार-कांटे' से लहूलुहान नजर आ रहे हैं।
तृणमूल: भीतरघात और पुराने चेहरों पर अविश्वास
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष की ज्वाला भड़क रही है। पूर्व बर्द्धमान जिले के खंडघोष और मंतेश्वर में पुराने बनाम नए की लड़ाई सड़क पर आ गई है। कई क्षेत्रों में नेताओं के करीबियों को टिकट मिलने से स्थानीय नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
उत्तर 24 परगना और हुगली के कुछ क्षेत्रों में भी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया है। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जो नेता पिछले पांच वर्षों में जमीन पर सक्रिय नहीं थे, उन्हें फिर से थोपना हार को निमंत्रण देना है।
हालांकि, पार्टी के कद्दावर नेता कल्याण बनर्जी ने दावा किया है कि ये छोटे-मोटे मतभेद हैं और पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। तृणमूल ने इस बार पिछले चुनाव में जीते 74 विधायकों को टिकट नहीं दिया है। वे लोग अब निर्दलीय या फिर अन्य किसी दल से चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
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भाजपा: 'बाहरी' बनाम 'भूमिपुत्र' की जंग
बांकुड़ा जिले की छातना विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान विधायक सत्यनारायण मुखोपाध्याय को दोबारा टिकट दिए जाने से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विधायक पड़ोसी क्षेत्र सालतोड़ा के निवासी हैं और जीतने के बाद उन्होंने क्षेत्र की सुध नहीं ली। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उन्हें 'भूमिपुत्र' उम्मीदवार चाहिए।
वहीं, विष्णुपुर में भाजपा की महिला प्रत्याशी शुक्ला चट्टोपाध्याय के खिलाफ मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी गईं। जिले में उनके 'निजी जीवन' और 'चरित्र' को लेकर आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए हैं।
शुक्ला ने इसे तृणमूल की साजिश बताते हुए मानहानि के मुकदमे की चेतावनी दी है, जबकि तृणमूल ने इसे भाजपा का आंतरिक कलह करार दिया है। कालना में भी कांग्रेस से आए सिद्धार्थ मजूमदार को टिकट मिलने पर स्थानीय क्षुब्ध कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय में ताला जड़ दिया गया।
हावड़ा में 'इस्तीफा'
हावड़ा की बाली विधानसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी संजय सिंह को 'बाहरी' बताते हुए 70 बूथ अध्यक्षों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। बेलुड़ में बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रत्याशी के सामने ही 'बाहरी वापस जाओ' के नारे लगाए। दूसरी ओर, डोमजूर में तृणमूल में भी काफी विरोध हो रहा है। इसे लेकर पार्टी डैमेज कंट्रोल की कोशिश में है।
बंगाल की सियासत अब केवल विकास या विचारधारा की नहीं, बल्कि 'अस्तित्व' और 'अधिकार' की लड़ाई बन गई है। यदि दोनों दलों ने समय रहते अपने कार्यकर्ताओं के इस असंतोष को शांत नहीं किया, तो यह 'विरोध का कांटा' चुनावी नतीजों के गणित को बिगाड़ सकता है।



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