कांकेर : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलवाद भले ही कम हो रहा हो, लेकिन गांवों में धर्मांतरण को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी कड़ी में बाड़ाटोला गांव में 14 धर्मांतरित परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आया है.गांव में माहौल इतना तनावपूर्ण है कि प्रशासन को भी जांच के लिए टीम भेजनी पड़ी, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया.
धर्मांतरण पर नाराजगी खुलकर सामने
बाड़ाटोला गांव के ग्रामीणों का कहना है कि जिन लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया है, वे जब तक अपने मूल धर्म में वापसी नहीं करते, तब तक उन पर लगाए गए सामाजिक प्रतिबंध जारी रहेंगे. ग्रामीणों ने इस फैसले को लेकर गांव में स्पष्ट नियम भी बना दिए हैं. इन नियमों के मुताबिक, धर्मांतरित परिवारों से किसी भी प्रकार की मदद, लेनदेन या सहयोग करने वालों पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा.
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धर्मांतरित परिवारों की शिकायत
धर्मांतरित 14 परिवारों ने ग्रामीणों द्वारा किए गए सामाजिक बहिष्कार की शिकायत चारामा SDM से की. शिकायत के बाद SDM की ओर से एक जांच टीम गांव पहुंची. टीम ने दोनों पक्षों से बात करने की कोशिश की, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि चर्चा के दौरान ही धर्मांतरित परिवारों के आधे लोग बैठक बीच में छोड़कर चले गए.
रीति-रिवाजों से दूरी पर ग्रामीणों की आपत्ति
गांव के लोगों का कहना है कि जो परिवार ईसाई धर्म अपना चुके हैं, उन्होंने खुद ही गांव की पारंपरिक रीति-रिवाजों से दूरी बना ली है. ग्रामीणों के अनुसार, कई सामाजिक अवसरों पर ये परिवार गांव की परंपराओं से अलग रहते हैं, जिसके कारण उन्हें यह कड़ा फैसला लेना पड़ा है. ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक ये लोग अपने मूल धर्म में वापस नहीं आते, तब तक पाबंदी बनी रहेगी.
खुलकर बोलने से कतराए धर्मांतरित व्यक्ति
गांव में हुई बैठक से कोई समाधान नहीं निकला. बातचीत के बीच ही धर्मांतरित समुदाय के कई लोग बैठक से उठकर चले गए. इसके बाद उन्होंने मीडिया के सामने बोलने से भी इनकार कर दिया. गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है और फिलहाल कोई पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा.



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