ब्रह्मा नगरी पुष्कर के युवा किसान विष्णु मीणा ने जामुन की खेती को अपनाकर अच्छी आमदनी का रास्ता तैयार किया है. किसान विष्णु ने अपने फार्म हाउस में करीब 30 से 40 जामुन के पौधे लगाए हुए हैं. इनमें देसी, ग्राफ्टेड और सिली किस्म के पौधे शामिल हैं, जो बड़े आकार और अच्छी गुणवत्ता के फल के लिए जाने जाते हैं. इन पौधों से हर साल अच्छी पैदावार मिलती है और बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है.
किसान विष्णु ने बताया कि जामुन की खेती धैर्य और सही देखभाल मांगती है. देसी जामुन के पौधे आमतौर पर फल देने में थोड़ा अधिक समय लेते हैं. पौधा लगाने के बाद लगभग 5 से 7 साल तक उसकी अच्छी तरह देखभाल और वृद्धि की जाती है, जिसके बाद करीब 8 साल में वह फल देना शुरू करता है. वहीं ग्राफ्टेड पौधे 3 से 4 साल में ही फल देना शुरू कर देते हैं, जिससे किसानों को जल्दी फायदा मिल सकता है.
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विष्णु ने आगे बताया कि उनके खेत में पिता के द्वारा लगाए गए 20 से 25 साल पुराने पौधे है जो आने वाले 40 50 सालों तक फल देंगे. जामुन की पैदावार हर साल एक समान नहीं रहती. कभी फल ज्यादा आता है तो कभी थोड़ा कम, लेकिन अच्छे मौसम और सही देखभाल के साथ एक पौधे से 30 से 50 हजार रुपए तक का फल मिल जाता है. विष्णु ने आगे बताया कि अजमेर के आस-पास के गांवों में भी कई किसान जामुन की खेती कर रहे हैं. यहां तैयार होने वाला जामुन स्थानीय बाजार के अलावा देश के कई बड़े शहरों में भी भेजा जाता है. यहां के जामुन की सप्लाई दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में की जाती है.
200 से 250 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाता है भाव
जामुन के भाव भी सीजन के अनुसार बदलते रहते हैं. सीजन की शुरुआत में जामुन का भाव 200 से 250 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाता है. इसके बाद जब बाजार में अधिक मात्रा में फल आने लगते हैं तो कीमत घटकर 70 से 80 रुपए प्रति किलो तक रह जाती है. पूरे सीजन में औसतन जामुन का भाव 100 से 150 रुपए प्रति किलो के बीच बना रहता है. किसान विष्णु का कहना है कि यदि किसान फलदार पौधों की खेती को अपनाएं और सही तकनीक से खेती करें तो इससे अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है.



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