सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC, ED रेड मामले में पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को फिर फटकार लगाई और पूछा, ईडी के अधिकारियों के मौलिक अधिकारों का क्या होगा? ममता बनर्जी द्वारा ED की याचिका पर आपत्ति जताने पर जस्टिस पीके मिश्रा और एनवी अंजारी की पीठ ने कहा, क्या ईडी के अधिकारी मात्र इसलिए भारत के नागरिक नहीं रह जाते क्योंकि वे ईडी के अधिकारी हैं। SC ने ED की याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर उठाई गई आपत्तियों पर सवाल उठाया और पूछा-क्या मुख्यमंत्री द्वारा ईडी के छापे में बाधा डालने पर ईडी राज्य पुलिस के पास जा सकती है?
अगर केंद्र में आपकी सरकार सत्ता में हो तो...
सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को I-PAC मामले में एक बार फिर फटकार लगाई और पूछा, अगर केंद्र में आपकी सरकार सत्ता में हो और कोई दूसरी राजनीतिक पार्टी राज्य स्तर पर ऐसा ही करे तो क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार से यह सवाल तब पूछा जब वह बंगाल की मुख्यमंत्री के कथित हस्तक्षेप के मामले की सुनवाई कर रही थी। यह मामला राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC के खिलाफ तलाशी अभियान में हस्तक्षेप से जुड़ा था।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के अधिकारियों पर तृणमूल के साथ काम करने वाली राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के कार्यालयों में जांच और तलाशी में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। ये छापे जनवरी की शुरुआत में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत मारे गए थे।
एसआईआर पर भी सीजेआई ने की टिप्पणी
पश्चिम बंगाल SIR से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की टिप्पणी, कहा-पश्चिम बंगाल को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में SIR का कार्यान्वयन सुचारू रूप से हुआ है। अन्य राज्यों में SIR को लेकर ज्यादा मुकदमेबाजी नहीं हो रही है। राज्य के वकीलों का कहना है कि 'तार्किक विसंगति' केवल पश्चिम बंगाल में लागू की गई है।



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