छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में खेती के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग हो रहे हैं. इन दिनों यहां गेहूं की “मावंती” किस्म तेजी से लोकप्रिय हो रही है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह किस्म कम लागत और कम समय में ज्यादा उत्पादन देने की क्षमता रखती है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिलेगा.
6 हेक्टेयर में चल रहा बीज उत्पादन
Krishi Vigyan Kendra Sarguja में करीब 6 हेक्टेयर जमीन पर मावंती किस्म का बीज उत्पादन किया जा रहा है. यह किस्म कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है. अभी इसे ट्रायल के तौर पर लगाया गया था, लेकिन बेहतर परिणाम मिलने के बाद अब बड़े स्तर पर बीज तैयार किया जा रहा है.
100-110 दिन में तैयार, सूखा भी झेले
इस गेहूं की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ 100 से 110 दिनों में तैयार हो जाता है. साथ ही इसमें सूखा सहन करने की क्षमता भी है, जिससे कम बारिश वाले इलाकों में भी किसान अच्छी पैदावार ले सकते हैं.
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
बड़ा दाना, ज्यादा उत्पादन
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक मावंती किस्म का दाना बड़ा और बोल्ड होता है. इसकी उत्पादन क्षमता भी काफी अच्छी बताई जा रही है, जिससे किसानों को ज्यादा पैदावार और बेहतर मुनाफा मिलने की उम्मीद है.
सही समय पर बुवाई से मिला फायदा
इस किस्म की बुवाई 25 नवंबर को की गई थी और सरगुजा की जलवायु में इसका प्रदर्शन काफी अच्छा रहा. शुरुआत में इसे प्रयोग के तौर पर लगाया गया था, लेकिन अब इसे बड़े स्तर पर अपनाने की तैयारी है.
बीज निगम से किसानों तक पहुंचेगा बीज
तैयार बीज को बीज निगम के जरिए किसानों तक पहुंचाया जाएगा. इससे पूरे सरगुजा संभाग में इस किस्म का विस्तार होगा और ज्यादा किसान इसका फायदा उठा सकेंगे.
खाद प्रबंधन भी आसान
इस फसल के लिए डीएपी, यूरिया और पोटाश का संतुलित उपयोग किया जा रहा है. एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) को 120:60:40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से दिया जाता है, जिससे फसल की अच्छी ग्रोथ होती है.
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरगुजा की मिट्टी और जलवायु किसानों के खेतों जैसी ही है. ऐसे में अगर किसान इस किस्म को अपनाते हैं, तो उन्हें कम लागत में ज्यादा उत्पादन और अच्छा मुनाफा मिल सकता है.



Comments