महासमुंद: रविवार 22 मार्च को खल्लारी माता मंदिर की पहाड़ी में हुए रोप-वे हादसे में छग प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा गठित टीम जांच समिति ने बुधवार को घटनास्थल का बारिकी से निरीक्षण कर हादसे की वास्तविक वजहों को जानने का प्रयास किया। जांच कमेटी संयोजक व खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव, सरायपाली विधायक चातुरीनंद, पूर्व प्रभारी महामंत्री अमरजीत चावला, बागबाहरा जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर दोपहर 12:30 बजे घटना स्थल पहुंचे। वहाँ उन्होंने पहाड़ी के नीचे स्थित रोप-वे स्टेशन का निरीक्षण किया और उसके संचालन की जानकारी ली। बाद वे तार टूटने से गिरी ट्रॉली का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यहाँ उपस्थित स्थानीय लोगों से घटनाक्रम व रोप-वे संचालन के विषय में भी जानकारी ली। इस दौरान बागबाहरा शहर अध्यक्ष लखबीर सिंह छाबड़ा, ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष देवनाथ साहू, ताम्रध्वज बघेल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी उपस्थित थे।
द्वारिकाधीश ने कहा रखरखाव में भी बरती गई लापरवाही
निरीक्षण के बाद गठित टीम के संयोजक व खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश ने बताया कि यहाँ हर साल हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ माता के दर्शन के लिए पहुंचती है और ज्यादातर लोग रोप-वे से पहाड़ी पर चढ़ते और उतरते हैं। ऐसे में कंपनी को खास रखरखाव करना चाहिए था। 10- 15 दिन तक पूरी जांच के साथ ही वजनी ट्रायल, मोटर व अन्य सामग्री की गहन जांच होनी थी। पर पता चला है कंपनी ने नवरात्रि पर्व के तीन दिन पूर्व बिना किसी तकनीकी (इंजीनियर) विशेषज्ञ की उपस्थिति के मेंटनेंस कार्य कराया। मेंटनेंस के दौरान अपर स्टेशन के मुख्य चक्का (व्हील) को बदला गया, जो पूर्व में लगे चक्का से भिन्न पाया गया। इसके अलावा रोप-वे संचालन के लिए पिछले दो-तीन महीनों से पर्याप्त विद्युत आपूर्ति उपलब्ध नहीं थी। जिसकी शिकायत पर मैंने घटना के लगभग एक घंटे पहले विद्युत विभाग के डीई से विद्युत आपूर्ति ठीक करने कहा था। वोल्टेज सही न मिलने के कारण रोप-वे का संचालन जनरेटर के माध्यम से किया जा रहा था। क्या जनरेटर की क्षमता पर्याप्त थी? इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रोप-वे का प्रारंभिक संचालन अनुभवी टीम द्वारा किया जा रहा था, किन्तु बिना किसी पूर्व सूचना व अज्ञात कारणों से उस टीम को बदलकर स्थानीय एवं कम अनुभवी टीम से संचालन कराया जा रहा था। रोप-वे संचालन में मेंटेनेंस व चेकलिस्ट अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अनिवार्य प्रक्रिया है, किन्तु अनुभवहीन टीम के कारण नियमित मेंटनेंस व आवश्यक चेकलिस्ट का संधारण नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जिस तार पर ट्रॉली का मूवमेंट होता है वह पूरा स्टील का होना चाहिए। परंतु निरीक्षण में हमने पाया कि तार के बीच में रस्सी का उपयोग किया गया, जो घोर लापरवाही को दर्शाता है।निरीक्षण में जो भी कमियां पाई गई है उसकी एक रिपोर्ट बनाकर जल्द ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी को सौंपा जाएगा।
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सरकार ने नहीं दिया पर्याप्त मुआवजा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ओर से घटना में मृतक और घायलों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा पर द्वारिकाधीश ने कहा कि मृतकों के परिजनों को 5 लाख और घायलों को 50 हजार मुआवजा राशि नाकाफी है। हम राज्य सरकार से मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपए और घायलों का मुफ्त इलाज और उचित मुआवजे मांग करते है।
महासमुंद गोविंद स्वामी की भी इलाज के दौरान मौत
खल्लारी मंदिर में रविवार को हुए दर्दनाक रोप-वे हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई है। इस हादसे में गंभीर रूप से घायल 47 वर्षीय गोविंद स्वामी ने मंगलवार रात करीब 9 बजे इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकी उनकी पत्नी नमिता स्वामी और सुपुत्री अंशुमिता की हालत गंभीर बनी हुई हैै। इससे पूर्व इस हादसे में रायपुर राजातालाब निवासी महिला शिक्षक आयुषी साहस की घटना के दिन ही मौत हो गई थी। वहीं पति का उपचार रायपुर में जारी है।
मृतकों के परिजन को 5 लाख रुपए मुआवजा खल्लारी माता मंदिर पहाड़ी में हुए रोप-वे हादसे पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत की घोषणा की है। मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपए की सहायता राशि और घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दुःख की घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।



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