चैत्र नवरात्र के नौवें यानी आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जिसे महानवमी भी कहा जाता है। पूरे विधि-विधान से मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना करने से साधक को मोक्ष, पूर्णता और आध्यात्मिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। चलिए पढ़ते हैं मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, स्वरूप व मंत्र।
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप
मां सिद्धिदात्री के स्वरूप की बात की जाए, तो वह शांत और मुस्कान भरे मुखमंडल से भक्तों को सुरक्षा और शांति का आशीर्वाद देती हैं। देवी सिद्धिदात्री कमल के फूल पर आसीन रहती हैं तथा सिंह की सवारी करती हैं। देवी मां की चार भुजाएं हैं। उनके एक दाहिने हाथ में गदा, दूसरे दाहिने हाथ में चक्र, एक बाएं हाथ में कमल का फूल और दूसरे बायें हाथ में शंख सुशोभित है।
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि
मां सिद्धिदात्री के मंत्र
1. ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
2. या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
3. प्रार्थना मंत्र -
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
4. ध्यान मंत्र -
वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम्॥



Comments