गर्मियों के मौसम में भिंडी की खेती किसानों के लिए ‘हरे सोने’ की तरह होती है. बाजार में इसकी लगातार मांग और कई बार कम आवक के चलते किसानों को फसल का बेहतरीन दाम मिलता है, जिससे वे कम समय में मोटी कमाई करते हैं. हालांकि, इस मुनाफे की राह में पीला मोजेक रोग एक बड़ी बाधा है. अगर समय रहते इस घातक रोग की रोकथाम न की जाए, तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है. कृषि एक्सपर्ट का मानना है कि सही प्रबंधन और कीट नियंत्रण के जरिए किसान न केवल अपनी फसल बचा सकते हैं, बल्कि अपनी आय को भी दोगुना कर सकते हैं.
पादप सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. नूतन वर्मा ने बताया कि भिंडी किसानों को जल्द आमदनी देने वाली फसल है, लेकिन इसमें रोगों का प्रबंधन जरूरी है. उन्होंने बताया कि पीला मोजेक रोग सफेद मक्खी के कारण फैलता है, जो पत्तियों की शिराओं को पीला कर देती है और धीरे-धीरे पूरे पौधे की ग्रोथ रोक देती है. इसके नियंत्रण के लिए किसानों को इमिडाक्लोप्रिड और थायमैथाएट जैसे कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए. साथ ही चेतावनी दी कि कीटनाशक के प्रयोग के कम से कम 5 दिनों तक तुड़ाई न करें, ताकि खाने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव न पड़े
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पीला मोजेक रोग के लक्षण और प्रभाव
भिंडी की फसल में पीला मोजेक एक विषाणु जनित रोग है, जो उपज को बुरी तरह प्रभावित करता है. इसकी शुरुआत पत्तियों की नसों या शिराओं के पीले होने से होती है. देखते ही देखते पत्तियां पूरी तरह पीली पड़ जाती हैं और फलों का रंग भी फीका पड़ जाता है. इससे न केवल पौधे की ग्रोथ रुक जाती है, बल्कि फलों की गुणवत्ता खराब होने से बाजार में उनका सही दाम नहीं मिल पाता. अगर शुरुआत में ही संक्रमित पौधों को खेत से हटाकर नष्ट न किया जाए, तो यह पूरी फसल में फैल जाता है.
रोग नियंत्रण के प्रभावी रासायनिक उपाय
इस बीमारी को फैलाने वाली सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड की 2 मिलीलीटर मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर पहला छिड़काव करें. इसके 15 दिनों के बाद, कीटों के पूर्ण खात्मे के लिए थायमैथाएट का दोबारा छिड़काव करना जरूरी है. यह दोहरा नियंत्रण चक्र सफेद मक्खी की आबादी को बढ़ने से रोकता है, जिससे पीला मोजेक वायरस का प्रसार रुक जाता है और फसल सुरक्षित बनी रहती है.
स्वास्थ्य सुरक्षा और हार्वेस्टिंग के नियम
कीटनाशकों के प्रयोग के समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. छिड़काव के तुरंत बाद भिंडी की तुड़ाई नहीं करनी चाहिए. कीटनाशक का असर कम होने में समय लगता है, इसलिए दवा डालने के कम से कम 5 दिन बाद ही फल तोड़ें. अगर इस दौरान न दिया जाए तो सब्जियों में मौजूद जहरीले अवशेष मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं.



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