रेप पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश

रेप पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के रिकॉर्ड में रेप पीड़िताओं की पहचान उजागर करने पर गंभीर चिंता जताई है। सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि इस पर लगी रोक का सख्ती से पालन करें।किशोरी से रेप के एक मामले में दोषी को बरी करने के फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह निर्देश जारी किया।

किस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 साल कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने यह कहते हुए उसे बरी कर दिया था कि पीड़िता का दो घंटे में 16 किमी यात्रा करना असंभव लगता है।

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अभियोजन पक्ष के मामले को खारिज नहीं किया जा सकता

इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने फैसले को रद्द करते हुए कहा कि भले ही समय-सीमा पर संदेह हो, घटना पर असर नहीं पड़ता। गवाहों के बयानों में छोटी-मोटी विसंगतियां होने के आधार पर पूरे अभियोजन पक्ष के मामले को खारिज नहीं किया जा सकता।

रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने पर 2 साल की जेल

  1. बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करना दंडनीय अपराध है। अपराधी को 228-ए के तहत दो साल तक की सजा हो सकती है।
  2. आईपीसी की धारा 376, 376ए, 376बी, 376सी, 376डी, 376जी के तहत पीड़िता का नाम पब्लिश करने पर दो साल की कैद और जुर्माना हो सकता है।
  3. कानून के तहत बलात्‍कार पीड़िता के निवास, परिजनों, दोस्‍तों, यूनिवर्सिटी या उससे जुड़े अन्‍य विवरण को भी उजागर नहीं किया जा सकता।
  4. पीड़िता दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 372(3) के तहत कोर्ट में "X" या "Y" जैसे नामों का उपयोग कर सकती है।
  5. यदि पीड़िता मानसिक रूप से अस्वस्थ है या उसकी मृत्यु हो गई है, तो पीड़िता के निकटतम संबंधी को आईपीसी की धारा 288ए के तहत पीड़िता की पहचान उजागर करने के विरुद्ध निकटतम न्यायालय में आवेदन करने का कानूनी अधिकार है।
  6. नाबालिग के मामले में, पहचान उजागर करने के लिए विशेष न्यायालय से अनुमति आवश्यक है। यहां नाबालिग का हित सर्वोपरि है। बालात्कार पीड़ित की पहचान को सुरक्षित रखने का उद्देश्य उन्हें अतिरिक्त आघात से बचाना और ऐसे अपराधों की रिपोर्ट करने के लिए अधिक सहायक वातावरण को बढ़ावा देना है।









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