अमेरिका में विरोध की लहर: ‘नो किंग्स’ प्रदर्शन में रिकॉर्ड भीड़ जुटी

अमेरिका में विरोध की लहर: ‘नो किंग्स’ प्रदर्शन में रिकॉर्ड भीड़ जुटी

आज पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट पर टिकी हैं, जहां जंग का मैदान हर दिन और खौफनाक होता जा रहा है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान भी खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है.लेकिन इस बार तनाव सिर्फ सरहदों तक सीमित नहीं है. इसका सबसे बड़ा असर सात समंदर पार अमेरिका के अंदर देखने को मिल रहा है.

अमेरिका में अब जो हो रहा है, वैसा नजारा शायद ही पहले कभी देखा गया हो. शनिवार (28 मार्च 2026) को पूरे अमेरिका में 'नो किंग्स' आंदोलन के बैनर तले हजारों रैलियां निकाली गईं, जिसमें लाखों लोग जुटे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध नीति और देश के हालात से नाराज होकर लाखों अमेरिकी सड़कों पर उतर आए. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ये राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ चल रहे देशव्यापी विरोध का तीसरा और अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन है.

ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर लाखों लोग

प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियां, बेतहाशा बढ़ती महंगाई और ईरान के साथ बिना सोचे-समझे शुरू किया गया युद्ध देश को बर्बाद कर रहा है. दिलचस्प बात ये है कि ये प्रदर्शन सिर्फ डेमोक्रेटिक पार्टी के गढ़ों में नहीं, बल्कि उन राज्यों में भी हुए जो पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन (ट्रंप की पार्टी) के समर्थक माने जाते हैं. शहरों से लेकर गांवों तक, लोगों ने तख्तियां लिए नारे लगाए और संगीत-डांस के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया.

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न्यूयॉर्क से सैन फ्रांसिस्को तक गुस्से की लहर

मैनहट्टन की सड़कों पर हजारों लोगों ने मार्च निकाला. उनके हाथों में जो बैनर थे, उन पर ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीतियों और ईरान युद्ध को तुरंत रोकने की मांग लिखी थी. सैन फ्रांसिस्को के एम्बार्केडेरो प्लाजा में भारी भीड़ जुटी. लोग सिर्फ युद्ध ही नहीं, बल्कि ट्रांसजेंडर अधिकारों और यूक्रेन जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी सरकार को घेरते नजर आए.

दिग्गजों का लगा जमावड़ा

सेंट पॉल, मिनेसोटा में सबसे बड़ी रैली हुई, जहां रॉक स्टार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने परफॉर्म किया. उन्होंने भावुक होते हुए उन दो लोगों, एलेक्स प्रीटी और रेनी गुड, को श्रद्धांजलि दी, जिन्हें इस साल जनवरी में फेडरल एजेंटों ने मार दिया था. स्प्रिंगस्टीन ने कहा, "अमेरिकी शहरों पर इस तरह के हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे."

'व्हाइट हाउस में बैठा तानाशाह'

मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने इस रैली में ट्रंप सरकार पर सीधा हमला बोला. उन्होंने ट्रंप को 'तानाशाह बनने की चाह रखने वाला व्यक्ति' करार दिया. गवर्नर ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने अपने फेडरल एजेंटों को भेजकर आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने उन लोगों की तारीफ की जो अपने पड़ोसियों की जान बचाने के लिए सरकार के खिलाफ खड़े हुए.

क्यों भड़का है जनता का गुस्सा?

आम अमेरिकियों की नाराजगी की तीन मुख्य वजहें हैं. पहली महंगा ईंधन, मिडिल ईस्ट की जंग की वजह से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम आदमी की जेब खाली हो रही है. दूसरी इमिग्रेशन नीतियां, एजेंटों द्वारा नकाब पहनकर की जा रही छापेमारी और हिंसा से लोग डरे हुए हैं.

तीसरी वजह ईरान युद्ध है. पिछले एक महीने से इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ जो युद्ध छेड़ा गया है, वह जनता को बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा. इसमें अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं. लोग नहीं चाहते कि अमेरिका एक और अंतहीन युद्ध में फंसे, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था और खराब हो जाए.

सरकार की नीतियों से खुश नहीं लोग

फ्लोरिडा जैसे कुछ राज्यों में ट्रंप के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस और हल्की झड़पें भी हुईं, जिससे समाज में बढ़ रही कड़वाहट साफ दिखती है. हालांकि, ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे. ताजा सर्वे बताते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. 'नो किंग्स' के बैनर तले जुटी यह भीड़ यह बताने के लिए काफी है कि अमेरिका की जनता अब अपनी सरकार की नीतियों से खुश नहीं है.

 









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