ट्रंप के बाद सत्ता की जंग, राष्ट्रपति पद की रेस में ये दो बड़े नाम आगे

ट्रंप के बाद सत्ता की जंग, राष्ट्रपति पद की रेस में ये दो बड़े नाम आगे

नई दिल्ली :  ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष अब केवल पश्चिम एशिया की भू-राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिकी घरेलू राजनीति और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की संभावित तस्वीर भी इससे प्रभावित होने लगी है।राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सामने जहां युद्ध को नियंत्रित कर राजनीतिक विरासत बचाने की चुनौती है, वहीं रिपब्लिकन खेमे में उनके संभावित उत्तराधिकारी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।सत्ता के गलियारों में सबसे अधिक यही पूछा जा रहा है कि ट्रंप जेडी वेंस और मार्को रूबियो में से किसे अगले दावेदार के तौर पर किसका नाम आगे बढ़ाएंगे। ट्रंप निजी बैठकों में अपने सहयोगियों और सलाहकारों से यही सवाल पूछ रहे हैं।

चूंकि अमेरिकी संविधान के तहत वह 2028 में फिर चुनाव नहीं लड़ सकते, इसलिए रिपब्लिकन पार्टी के भीतर उत्तराधिकार का प्रश्न पहले ही आकार लेने लगा है। ईरान युद्ध ने इस बहस को और तेज कर दिया है क्योंकि वेंस और रुबियो दोनों ही इस संकट प्रबंधन में अलग-अलग राजनीतिक शैली के साथ सामने आए हैं।

वेंस का संयमित और सतर्क रुख

जेडी वेंस ने ईरान युद्ध पर अपेक्षाकृत संयमित और सतर्क रुख अपनाया है। पूर्व मरीन अधिकारी और इराक युद्ध के अनुभवी वेंस लंबे समय से अमेरिका की लंबी विदेशी सैन्य उलझनों के आलोचक रहे हैं।

हालांकि उन्होंने ओवल आफिस में ट्रंप के साथ खड़े होकर यह भी कहा कि वह राष्ट्रपति की रणनीति के साथ हैं और ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने देना चाहिए।

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रूबियो का ट्रंप की तरह आक्रामक अंदाज

इसके विपरीत मार्को रुबियो ने ट्रंप की आक्रामक नीति का खुलकर समर्थन किया है। विदेश मंत्री होने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में भी उनकी भूमिका बढ़ी है। व्हाइट हाउस के भीतर उन्हें संकट के दौरान स्थिर और निर्णायक चेहरा माना जा रहा है।

विश्लेषकों का आकलन है कि यदि युद्ध अमेरिकी हितों के अनुकूल शीघ्र समाप्त होता है तो इसका लाभ रुबियो को मिल सकता है।

सर्वकालिक न्यूनतम स्तर पर ट्रंप की रेटिंग

ईरान युद्ध के चलते ट्रंप की लोकप्रियता पर दबाव बढ़ा है। रॉयटर्स/इप्सोस के चार दिन के सर्वेक्षण में ट्रंप की रेटिंग घटकर 36 प्रतिशत पर आ गई, जो उनके दूसरे कार्यकाल में अब तक का सबसे निचला स्तर है। इसका बड़ा कारण ईंधन कीमतों में तेजी और युद्ध को लेकर बढ़ती सार्वजनिक असहमति मानी जा रही है।

रिपब्लिकन मतदाताओं में हालांकि अमेरिकी हमलों के समर्थन का स्तर अब भी मजबूत है- करीब 75 प्रतिशत रिपब्लिकन सैन्य कार्रवाई के पक्ष में हैं, जबकि डेमोक्रेट मतदाताओं में समर्थन बहुत कम है।

रिपब्लिकन रणनीतिकारों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और अमेरिकी सैनिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ती है तो वेंस यह कह सकेंगे कि उन्होंने पार्टी के युद्ध-विरोधी वर्ग की भावना पहले ही समझ ली थी। वहीं यदि सैन्य दबाव के जरिए ईरान झुकता है तो रुबियो ट्रंप के सबसे भरोसेमंद संकट प्रबंधक के रूप में उभरेंगे।

रूबियो की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी

हाल में आयोजित कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कांफ्रेंस (सीपैक) के स्ट्रा पोल में वेंस को स्पष्ट बढ़त मिली। 1600 से अधिक प्रतिभागियों में से 53 प्रतिशत ने उन्हें अगले रिपब्लिकन राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में पसंद किया, जबकि रुबियो 35 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहे। पिछले वर्ष रुबियो को केवल तीन प्रतिशत समर्थन मिला था, जिससे साफ है कि उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है।









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