जीवन में कई बार सब कुछ सही होते हुए भी शादी-ब्याह की बातें नहीं बन पातीं या करियर में अचानक रुकावटें आने लगती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अक्सर इसका कारण कुंडली में 'मांगलिक दोष' बताया जाता है।2 अप्रैल 2026 को पूरे देश में हनुमान जन्मोत्सव का पावन पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हनुमान जी मंगल ग्रह के अधिपति देव हैं। इसलिए, मांगलिक दोष के प्रभाव को कम करने के लिए इस दिन से बेहतर और कोई मौका नहीं हो सकता। अगर आप भी इस दोष की वजह से परेशान हैं, तो इस जन्मोत्सव पर ये 7 आसान उपाय आपकी जिंदगी में खुशियां भर सकते हैं।
हनुमान जयंती पर पूजा का सटीक समय
ब्रह्म मुहूर्त (अत्यंत फलदायी): सुबह 4:38 बजे से 5:24 बजे तक
सुबह की पूजा का उत्तम समय: सुबह 6:10 बजे से 7:44 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त (दिन का सबसे शुभ समय): दोपहर 12:00 बजे से 12:50 बजे तक
शाम की पूजा का समय: शाम 6:39 बजे से 8:06 बजे तक
मांगलिक दोष दूर करने के उपाय
हनुमान जन्मोत्सव पर बजरंगबली को चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूरी चोला चढ़ाना सबसे प्रभावशाली माना जाता है। इससे मंगल का अशुभ प्रभाव खत्म होता है।
अगर आप मानसिक तनाव (Mental Stress) या अज्ञात भय से घिरे रहते हैं, तो इस दिन सुंदरकांड का पाठ जरूर करें। यह न केवल दोष दूर करता है, बल्कि आपके अंदर गजब का आत्मविश्वास भर देता है।
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कहते हैं हनुमान जी वहां सबसे पहले पहुंचते हैं जहां प्रभु राम का नाम लिया जाता है। मांगलिक दोष दूर करने के लिए 'राम-राम' का 108 बार जाप करें। यह सबसे सरल और अचूक उपाय है।
हनुमान जी को लाल रंग प्रिय है। इस दिन उन्हें लाल गुलाब के फूल और बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इससे मंगल ग्रह शांत होता है और शुभ फल मिलने लगते हैं।
अगर शादी में बहुत ज्यादा देरी हो रही है या बाधाएं आ रही हैं, तो हनुमान जन्मोत्सव पर पूरी श्रद्धा के साथ बजरंग बाण का पाठ करें।
इस दिन बंदरों को गुड़-चना खिलाएं या किसी जरूरतमंद को लाल मसूर की दाल और गुड़ का दान करें। दान करने से ग्रहों की नकारात्मकता दूर होती है।
कोशिश करें कि इस दिन किसी मंदिर में जाकर सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करें। भक्तों के साथ मिलकर कीर्तन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है।
शास्त्रों के नियम
पौराणिक मान्यताओं और ज्योतिष ग्रंथों जैसे 'बृहद पाराशर होराशास्त्र' में ग्रहों की शांति के उपाय बताए गए हैं। साथ ही, 'रामचरितमानस' के सुंदरकांड और 'हनुमान बाहुक' में स्पष्ट है कि हनुमान जी की शरण में जाने से शनि और मंगल जैसे उग्र ग्रहों के दोष शांत हो जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हनुमान जी ने इन ग्रहों के गर्व को चूर किया था।



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