नई दिल्ली: एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पाकिस्तान को भरोसेमंद साझेदार मानते हुए पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच शांति बहाली के लिए मध्यस्थ की भूमिका दे चुके हैं, वहीं अमेरिकी कांग्रेस की नई रिपोर्ट ने पाकिस्तान को फिर आतंकवाद की स्थायी शरणस्थली बताया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में अनेक आतंकी संगठन दशकों से जमे हुए हैं। बड़े सैन्य अभियानों, हवाई हमलों खुफिया अभियानों के बावजूद उनके ढांचे को निर्णायक रूप से समाप्त नहीं किया जा सका है। 25 मार्च को जारी अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान को अनेक सशस्त्र और आतंकी समूहों संचालन केंद्र माना है। इनमें कुछ संगठन 1980 के दशक से सक्रिय हैं और आज भी मजबूत ढांचे के साथ काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये संगठन वैश्विक एजेंडे, अफगानिस्तान-केंद्रित, भारत-केंद्रित, घरेलू या सांप्रदायिक स्वरूप में विभाजित हैं। इनमें से 12 संगठनों को अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित किया जा चुका है। अधिकांश संगठन इस्लामी चरमपंथी विचारधारा का पालन करते हैं।
अमेरिकी कांग्रेस ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान द्वारा समय-समय पर चलाए गए सैन्य अभियानों, हवाई हमलों और सैकड़ों हजार खुफिया कार्रवाईयों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका द्वारा चिन्हित आतंकी संगठन लगातार सक्रिय बने हुए हैं।
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
रिपोर्ट में लश्कर-ए-तैयबा का उल्लेख
रिपोर्ट में विशेष रूप से लश्कर-ए-तैयबा का उल्लेख किया गया है। यह संगठन 1980 के दशक के उत्तरार्ध में पाकिस्तान में बना और 2001 में विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार हाफिज सईद के नेतृत्व वाला यह संगठन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान अधिकृत गुलाम कश्मीर में सक्रिय रहा तथा प्रतिबंधों से बचने के लिए उसने अपना नाम बदलकर जमात-उद-दावा कर लिया।
कई हजार लड़ाकों वाले इस संगठन को 2008 मुंबई आतंकी हमले सहित कई बड़े हमलों का जिम्मेदार बताया गया है। इसी तरह जैश-ए-मोहम्मद को भी रिपोर्ट में प्रमुख खतरे के रूप में दर्ज किया गया है। अमेरिकी रिपोर्ट में हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी, हरकत-उल-मुजाहिदीन और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों का भी उल्लेख किया गया है, जो पाकिस्तान से संचालन जारी रखे हुए हैं।



Comments