स्कूल बुलिंग का असर बच्चे की शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ता है। इसलिए पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे इस ओर ध्यान दें कि कहीं उनका बच्चा स्कूल में बुली तो नहीं हो रहा। इस बात का पता लगाने के लिए बच्चों से सही तरीके से बात करना और उन्हें सपोर्ट करना जरूरी है। आइए जानें आप कैसे पता लगा सकते हैं कि आपका बच्चा स्कूल में बुली हो रहा है और इसे रोकने के लिए आप क्या कर सकते हैं।
क्या है स्कूल बुलिंग की डेफिनेशन?
यूनेस्को के मुताबिक, स्कूल बुलिंग एक ऐसी हानिकारक सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें ताकत का असंतुलन साफ दिखाई देता है। यह अक्सर दोहराया जाने वाला अवांछनीय व्यवहार है, जो छात्रों या स्कूल कर्मियों के बीच शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक नुकसान पहुंचाता है।
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आज के दौर में यह केवल स्कूल के मैदान तक सीमित नहीं है; साइबर बुलिंग के रूप में यह इंटरनेट के जरिए बच्चे तक कहीं भी और कभी भी पहुंच सकती है, जिससे उनकी मानसिक सेहत को गहरा नुकसान पहुंचता है।
बच्चों में बुलिंग के संकेत
कई बार बच्चे अपनी परेशानी बोलकर नहीं बता पाते, लेकिन एक जागरूक पेरेंट होने के तौर पर आपको इन लक्षणों पर गौर करना चाहिए-
शारीरिक संकेत- शरीर पर बिना किसी कारण के चोट, खरोंच या घाव के निशान मिलना।
इमोशनल बदलाव- बच्चा अचानक बहुत ज्यादा अलर्ट, घबराया हुआ या परेशान रहने लगे। गुस्सा आना या चिड़चिड़ा व्यवहार भी एक संकेत हो सकता है।
स्कूल से दूरी- स्कूल जाने या स्कूल के फंक्शन में शामिल होने से डरना, बार-बार सिरदर्द या पेट दर्द का बहाना बनाकर घर वापस बुलाने की जिद करना।
सामाजिक अलगाव- अचानक दोस्तों से मिलना बंद कर देना, सामाजिक स्थितियों से बचना या हमेशा बड़ों के आसपास रहने की कोशिश करना।
नींद और पढ़ाई- ठीक से नींद न आना, डरावने सपने देखना और पढ़ाई के प्रदर्शन में अचानक गिरावट आना।
सामान का नुकसान- कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स या पर्सनल सामान का बार-बार खो जाना या टूट जाना।
ऑनलाइन व्यवहार- फोन या इंटरनेट इस्तेमाल करने के बाद परेशान दिखना या अपनी ऑनलाइन एक्टिविटीज को लेकर बहुत सीक्रेटिव होना।
बुलिंग रोकने के लिए आप क्या कर सकते हैं?



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