मानव तस्करी पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को अल्टीमेटम

मानव तस्करी पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को अल्टीमेटम

नई दिल्ली :  सुप्रीम कोर्ट ने मानव तस्करी और लापता व्यक्तियों से संबंधित मामले में कई राज्यों और अधिकारियों को जवाब नहीं देने के लिए फटकार लगाई है और सर्वोच्च अदालत के एक राष्ट्रीय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के निर्माण का निर्देश का पालन नहीं करने पर अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी है।

पीठ ने अपने आदेश में रिकॉर्ड किया कि नोटिस जारी करने के बावजूद भारत सरकार और हरियाणा, मिजोरम, केरलम, ओडिशा और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। इस मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और आर. महादेवन की पीठ ने इस चूक को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया कि दोषी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) को 16 अप्रैल तक व्यक्तिगत रूप से पुष्टि किए गए हलफनामे दाखिल करने होंगे। इसमें उनकी अनुपस्थिति का स्पष्टीकरण दिया जाएगा। अन्यथा उन्हें इस न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

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पीठ ने स्पष्ट किया कि अनुपालन नहीं करने पर कड़े परिणामों का सामना करना पड़ेगा और चेतावनी दी कि परिणामस्वरूप अवमानना नोटिस जारी किए जा सकते हैं। एक समान और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र की आवश्यकता पर जोर देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे ऐसे मामलों में पालन की जाने वाली प्रक्रियाओं का विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करें।

प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय गृह सचिव, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समकक्षों और पुलिस महानिदेशकों को सभी हितधारकों के साथ परामर्श करने और एक महीने के भीतर ठोस सुझाव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इन सिफारिशों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन एकत्रित किया जाएगा ताकि समूचे भारत का एक एसओपी तैयार हो।

सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व आइपीएस अधिकारी पी.एम. नायर, केंद्रीय गृह मंत्रालय के निदेशक वीरेंद्र कुमार मिश्रा और अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एस.डी. संजय की एक कोर समिति का गठन किया, जो संयोजक और समन्वयक के रूप में कार्य करेंगे।









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