बड़ा साइबर फ्रॉड उजागर: 86 लाख का अवैध लेनदेन, 10 आरोपी दबोचे गए

बड़ा साइबर फ्रॉड उजागर: 86 लाख का अवैध लेनदेन, 10 आरोपी दबोचे गए

दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग (Durg) जिले में म्यूल अकाउंट के जरिए किए गए बड़े साइबर फ्रॉड मामले में पुलिस ने अहम कार्रवाई करते हुए 10 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस कार्रवाई के साथ ही अब तक इस मामले में कुल 52 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. यह मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां साल 2025 में साइबर ठगी के जरिए लाखों रुपये का लेनदेन सामने आया था.

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि मोहन नगर स्थित कर्नाटक बैंक की शाखा में खोले गए 111 बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के पैसों के लेनदेन के लिए किया जा रहा था. इन खातों के माध्यम से करीब 86 लाख रुपये का संदिग्ध और अवैध ट्रांजैक्शन किया गया. यह रकम देश के विभिन्न राज्यों से ठगी कर जुटाई गई थी.

केंद्र सरकार के पोर्टल से मिली थी जानकारी

दुर्ग पुलिस को इस पूरे नेटवर्क की जानकारी वर्ष 2025 में केंद्र सरकार के समन्वय पोर्टल के जरिए मिली थी. सूचना में बताया गया था कि इन खातों में देशभर से बड़ी मात्रा में पैसे ट्रांसफर हो रहे हैं और इनका संबंध साइबर फ्रॉड से है. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.

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 लालच में किराए पर दिए गए बैंक खाते

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार सभी आरोपी दुर्ग भिलाई क्षेत्र के निवासी हैं. ये लोग मामूली रकम के लालच में अपने बैंक खाते किराए पर दे देते थे. खाताधारकों को हर महीने 5 से 7 हजार रुपये दिए जाते थे, जिसके बदले उनके खातों का इस्तेमाल अवैध लेनदेन के लिए किया जाता था.

खातों में जोड़ा जाता था फ्रॉडस्टर्स का मोबाइल नंबर

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी इन खातों में अपना मोबाइल नंबर लिंक करवा लेते थे, जिससे खाताधारकों को लेनदेन की जानकारी भी नहीं मिलती थी. इस तरह बिना किसी संदेह के इन खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर से उधर ट्रांसफर किया जाता था.

पहले 42 आरोपी हो चुके थे गिरफ्तार

इस मामले में इससे पहले 42 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. अब 10 और गिरफ्तारी के बाद कुल संख्या 52 हो गई है. पुलिस का कहना है कि मामले में आगे भी जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते किसी भी लालच में आकर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें. ऐसे मामलों में खाताधारक भी अपराध में शामिल माने जाते हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है.









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