इस्फहान में बड़ा धमाका, परमाणु केंद्र के पास 900 किलो बम गिराने का दावा

इस्फहान में बड़ा धमाका, परमाणु केंद्र के पास 900 किलो बम गिराने का दावा

 नई दिल्ली :पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध मंगलवार को और तीखा हो गया, जब ईरान के इस्फहान परमाणु केंद्र के करीब 900 किलो के बंकर बस्टर बम से हमला किया गया। इसमें भूमिगत हथियार डिपो को निशाना बनाया गया।

ट्रंप ने इस हमले के वीडियो फुटेज भी जारी किए

हमले के बाद रात के अंधेरे में कई मीटर ऊंची आग की लपटें उठीं और क्षेत्र धुएं से भर गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के वीडियो फुटेज भी जारी किए। जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी में तेल ले जा रहे कुवैती टैंकर 'अल साल्मी' को निशाना बनाया, जिसमें आग लग गई।

अधिकारियों के अनुसार टैंकर पर 12 लाख बैरल सऊदी और आठ लाख बैरल कुवैती कच्चा तेल था, हालांकि किसी बड़े रिसाव या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई। इस बीच, ट्रंप ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह खुले बिना भी अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान समाप्त कर सकता है।

अराघची ने अमेरिको को लेकर कही ये बात

वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह चार से छह सप्ताह की तय समयसीमा में अभियान समेटने के पक्ष में हैं।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उन्हें अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकाफ की तरफ से सीधे संदेश मिल रहे हैं, लेकिन इन्हें औपचारिक वार्ता नहीं माना जा सकता।

अराघची ने बताया कि ये संदेश कभी मित्र देशों के माध्यम से चेतावनी के रूप में, तो कभी विचारों के आदान-प्रदान के रूप में पहुंचाए जा रहे हैं। नाटो देशों और ट्रंप के बीच एक बार फिर तनातनी बढ़ गई, जब स्पेन के बाद इटली और फ्रांस ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अड्डे और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल से मना कर दिया।

नाटो देशों के रवैये से नाराज ट्रंप ने साफ कहा कि जिन्हें भी तेल की जरूरत है, वे हिम्मत दिखाएं और खुद होर्मुज जाकर तेल ले लें।अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान युद्ध में अगले कुछ दिन बेहद निर्णायक होनेवाले हैं। पाकिस्तान और चीन ने मिलकर ईरान युद्धविराम के लिए पांच सूत्रीय उपायों की घोषणा की है।

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युद्ध लंबा न खिंचे, इसलिए कदम खींच सकते हैं ट्रंप

प्रेट्र के अनुसार, वाल स्ट्रीट जर्नल ने प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप मानते हैं कि ईरान की नौसैनिक क्षमता और मिसाइल भंडार को कमजोर कर अमेरिका अपने मुख्य सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है। ऐसे में जलमार्ग खोलने की लंबी सैन्य कार्रवाई के बजाय आगे कूटनीतिक दबाव के जरिये व्यापार बहाली पर जोर दिया जा सकता है। इसके अलावा जलमार्ग को बलपूर्वक खोलने की कोशिश युद्ध को उनकी तय चार से छह सप्ताह की समयसीमा से आगे ले जाएगी।

व्हाइट हाउस ने भी कहा है कि सैन्य अभियान की अवधि शुरू से सीमित रखी गई थी। वहीं ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर नाटो देशों को निशाने पर लिया। उन्होंने लिखा कि ब्रिटेन जैसे देश जो होर्मुज जलमार्ग से तेल नहीं ले पा रहे हैं, तो उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है।

उन्होंने कहा कि जिसे भी तेल चाहिए उसे हिम्मत दिखानी होगी और होर्मुज को खुलवाकर तेल खरीदना चाहिए। ट्रंप ने ये भी कहा कि अब देशों को खुद अपनी लड़ाई लड़ना सीखना होगा। अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे वे अमेरिका की मदद के लिए नहीं आए थे।

इस्फहान पर हमले से पहले यूरेनियम पहुंचने के संकेत

रॉयटर के अनुसार, अमेरिका-इजरायल ने मंगलवार तड़के ईरान पर हमलों की नई लहर शुरू की, जिसमें तेहरान के साथ इस्फहान परमाणु केंद्र के करीब स्थित हथियार डिपो को निशाना बनाया गया।

ट्रंप द्वारा साझा वीडियो में इस्फहान में बड़े विस्फोट दिखाई दिए, हालांकि ईरान ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। उपग्रह चित्रों से संकेत मिले हैं कि हमलों से ठीक पहले अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम से भरे 18 कंटेनरों वाला ट्रक एक परमाणु केंद्र की सुरंग में पहुंचा था।

विश्लेषकों का मानना है कि इसमें 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम का बड़ा भंडार हो सकता है। ये जगह मंगलवार को हुए हमले से 20 किलोमीटर दूर बताई गई है।

ईरान ने गलती से चीन के टैंकर को बनाया निशाना

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ईरानी ड्रोन ने कुवैत के तेल टैंकर अल साल्मी को दुबई के तट के करीब निशाना बनाया। इसमें से भीषण आग की लपटें उठती देखी गईं। तेल के रिसाव की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि न तो रिसाव हुआ है, न कोई हताहत हुआ।

टैंकर ट्रैकर्स डॉट कॉम के अनुसार, ये जहाज चीन के क्विंगडाओ जा रहा था और इस पर 12 लाख बैरल सऊदी कच्चा तेल और आठ लाख बैरल कुवैती कच्चा तेल भरा हुआ था। वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि इस जहाज के बगल में खड़े इजरायली गठजोड़ वाले कंटेनर जहाज पर हमला किया गया था।

दुबई में गिरा ड्रोन मलबा, चार घायल

दुबई में ही एक आवासीय इलाके में ड्रोन का मलबा गिरने से चार लोग घायल हो गए। बहरीन में भी सायरन पूरे दिन बजते रहे, जबकि सऊदी अरब ने राजधानी रियाद की तरफ आ रही तीन बैलिस्टिक मिसाइलें इंटरसेप्ट करने का दावा किया। इजरायल में भी ईरानी मिसाइलों की बौछार के चलते पूरे दिन तेज धमाके सुने गए।

इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हमले तेज किए और कहा कि इस इलाके में मौजूद एक-एक घर को नष्ट किया जाएगा। इजरायल के चार सैनिक लेबनान में मारे गए हैं। वहीं ईरान के उत्तर पश्चिम शहर जांजान में एक समागम स्थल पर हुए हमले में तीन लोगों के मारे जाने की खबर है।

जॉर्डन ने चार ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया

इजरायली सेना ने कहा कि उसने रातभर तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल विस्फोटक फैक्ट्री, हथियार अनुसंधान केंद्रों और मिसाइल लांच प्रणालियों पर हमले किए। जॉर्डन ने चार ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया।

ईरान की जमीन पर दुश्मन उतरा तो पैर काट देंगे

एएनआई के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड के खातम अल अनबिया मुख्यालय ने एक बार फिर अमेरिका को जमीनी सैन्य अभियान को लेकर चेतावनी दी है।

प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी ने कहा कि ईरान की जमीन पर कदम रखनेवाले किसी भी आक्रांता के पैर काट दिए जाएंगे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल की तरफ से फार्मा कंपनियों को निशाना बनाए जाने की निंदा की और कहा कि उन्होंने अपनी मंशा जाहिर कर दी है।

एक्स पर एक पोस्ट में अराघची ने कहा कि इजरायल ये भूल गया कि उसके सामने निहत्थे फलस्तीनी लोग नहीं हैं। हमारी ताकतवर सेना उचित जवाब देगी।

ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि अमेरिका के जमीनी सैन्य अभियान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए रूस के चेचेन विद्रोही भी इस संघर्ष में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसके लिए पूरी तैयारी कर रखी है।

पश्चिम एशिया में ईरानी खतरे का मुकाबला करने को तैयार इजरायल

वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उनका देश पश्चिम एशिया में ईरानी खतरे का मुकाबला करने के लिए कई महत्वपूर्ण देशों के साथ नए रणनीतिक गठबंधन बना रहा है। हालांकि उन्होंने उन देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए और न ही सहयोग के स्वरूप पर विस्तार से जानकारी दी। उनके बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में नए पुनर्संयोजन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

एपल-गूगल समेत 18 अमेरिकी कंपनियां आज से निशाने पर

रेवोल्यूशनरी गार्ड (आइआरजीसी) ने कहा है कि पश्चिम एशिया में मौजूद 18 अमेरिकी टेक कंपनियों पर बुधवार रात आठ बजे से हमला कर सकता है। रायटर के अनुसार, इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों से कहा गया है कि वे तुरंत उन जगहों को खाली कर दें, क्योंकि खतरा बढ़ सकता है।

आईआरजीसी की सूची में माइक्रोसाफ्ट, गूगल, एपल, इंटेल, आइबीएम, टेस्ला और बोइंग सहित 18 कंपनियां शामिल हैं। कहा गया कि ये कंपनियां हमलों की योजना बनाने और निगरानी में मदद करती हैं, इसलिए अब उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। ईरान में हर आतंकी कार्रवाई के बदले इन कंपनियों की संबंधित कंपनियों के कार्यालयों को नष्ट किया जाएगा।

व्हाइट हाउस ने कही ये बात

धमकी के बाद व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका इन हमलों का मुकाबला करने के लिए तैयार है। वहीं, अमेरिका का तीसरा विमान वाहक पोत यूएसएस जार्ज एचडब्ल्यू बुश पश्चिम एशिया में तैनात कर दिया गया है।

 









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