ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी लोगों के नाम एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने ईरान को किसी भी देश के लिए खतरा नहीं बताते हुए ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति को कठघरे में खड़ा गिया है। पेजेश्कियन ने अमेरिका के लोगों से अपील की है कि वे “विकृतियों और बनावटी कथाओं की बाढ़” से आगे देखें और यह सवाल करें कि ईरान पर चल रहे अमेरिका-इजरायली युद्ध से आखिर किसके हित सध रहे हैं। इस खुली चिट्ठी में पेजेश्कियन ने बुधवार को अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए पूछा कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति “आज वाकई अमेरिकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है”?
“इस युद्ध से अमेरिकी जनता के ठीक कौन से हित सध रहे हैं?
ईरानी राष्ट्रपति ने चिट्ठी के जरिये सवाल पूछा, “इस युद्ध से अमेरिकी जनता के ठीक कौन से हित सध रहे हैं?” “क्या निर्दोष बच्चों की हत्या, कैंसर के इलाज वाली दवा फैक्टरियों का विध्वंस, या किसी देश को ‘पाषाण युग में वापस भेजने’ का घमंड सिवाय अमेरिका की वैश्विक छवि को और अधिक नुकसान पहुंचाने के इन कामों का कोई उद्देश्य है?”
ईरान किसी देश के लिए खतरा नहीं
पेजेश्कियन ने तेहरान को ‘खतरा’ बताए जाने का भी खंडन किया। उन्होंने कहा कि ईरान के वार्ताकार बहुपक्षीय परमाणु वार्ताओं में शामिल थे, तब भी दो बार ईरान पर हमला किया गया। एक बार जून 2025 में जब इजरायल ने 12 दिन का युद्ध शुरू किया और अमेरिका ने भी संक्षिप्त रूप से उस अभियान में हिस्सा लिया। दूसरी बार इस साल फरवरी के अंत में हमला किया गया। उन्होंने कहा, “ईरान की महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं जिनमें ऊर्जा और औद्योगिक प्रतिष्ठान शामिल हैं पर हमला सीधे तौर पर ईरानी जनता को निशाना बनाता है। यह युद्ध अपराध होने के अलावा, ईरान की सीमाओं से कहीं आगे तक परिणाम पैदा करता है।” उन्होंने आगे लिखा कि ये कार्रवाइयां अस्थिरता पैदा करती हैं, मानवीय और आर्थिक लागत बढ़ाती हैं, तनाव के चक्र को जारी रखती हैं और वर्षों तक रहने वाले आक्रोश के बीज बोती हैं। यह शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि रणनीतिक भ्रम और स्थायी समाधान हासिल करने में असमर्थता का संकेत है।
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ट्रंप की धमकी के बाद पेजेश्कियन की चिट्ठी
ईरानी राष्ट्रपति की यह चिट्ठी ट्रंप द्वारा तेहरान के खिलाफ दी गई नवीनतम धमकी के कुछ घंटों बाद आई है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान को “विनाश के गर्त में धकेलता रहेगा या जैसा कहा जाता है, पाषाण युग में वापस भेज देगा!!!” अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान के “नए शासन के राष्ट्रपति” ने युद्ध समाप्त करने के लिए युद्धविराम की मांग की है, जिस दावे को ईरानी अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी जोर दिया कि ईरान अन्य राष्ट्रों या अमेरिकी जनता के प्रति “कोई शत्रुता” नहीं रखता।
पेजेश्कियन ने युद्ध समाप्त करने के लिए तीन शर्तें बताईं
अपनी चिट्ठी में पेजेश्कियन ने यह भी सवाल किया कि क्या ट्रंप प्रशासन 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने में अमेरिका के सबसे बड़े मध्य पूर्वी सहयोगी इजरायल द्वारा “मैनिपुलेटेड” किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दशकों से अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए उकसा रहे हैं और वाशिंगटन-तेहरान के बीच कूटनीति को पटरी से उतारने की भी कोशिश कर रहे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायली सेना ने ईरान की महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं पर कई हमलों की जिम्मेदारी भी ली है, जिससे संघर्ष और बढ़ा है।
अमेरिका को बताया इजरायल का प्रॉक्सी
पेजेश्कियन ने अपनी चिट्ठी में कहा, “क्या यह भी सच नहीं है कि अमेरिका इस आक्रामकता में इजरायल का प्रॉक्सी बनकर शामिल हुआ है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इजरायल “ईरान को खतरा” बताकर “फिलिस्तीनियों के खिलाफ अपने अपराधों से वैश्विक ध्यान हटाना” चाहता है। उन्होंने लिखा, “क्या यह स्पष्ट नहीं है कि इजरायल अब ईरान से आखिरी अमेरिकी सैनिक और आखिरी अमेरिकी टैक्सपेयर के डॉलर तक लड़ना चाहता है और अपने भ्रम का बोझ ईरान, पूरे क्षेत्र और अमेरिका पर डालते हुए वह अवैध हितों को हासिल करना चाहता है।



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