नगरी :गर्मी का सीजन लगते ही जंगलो मे वन्य प्राणीयो के लिये आफत आ जाती है भीषण गर्मी मे वन्य प्राणी जंगलो मे आग और सूखे तलाब नदी नाले के चलते पानी और चारा के लिये भटकते वन ग्राम के नजदीक पहुचते है जहा अवारा कुत्ते व शिकारियो के चपेट मे अपनी जान गंवा बैठते है वन विभाग द्वारा हर वर्ष जंगलो को आग से बचाने व वन्य प्राणीयो के प्यास बुझाने लाखो खर्च करते है मगर उसके बाद भी वन्य प्राणीयो को पेयजल के लिये भटकना पडता है.धमतरी जिले के जंगलो को वन्य प्राणीयो व सुरक्षित जंगल के नाम से जाना जाता है जहा एक समय मे जंगलो मे हर तरफ वन्य प्राणी व घने जंगलो का एहसास होता था मगर अब इस जंगल को शिकारियो व अवैध तस्करो की नजर लग गई या फिर वन विभाग के अधिकारी ही अपने कर्त्तव्य से मुह मोड रहे जहा आज जंगलो मे दिन ब दिन मानव दबाव बढते जा रहा है और इस जंगल को अपने लिये सुरक्षित महसूस करने वाले वन्य प्राणी धीरे धीरे यहा से गायब हो रहे या शिकारियो के हत्थे चढ कर अपना वंश खत्म कर रहे या सुरक्षित ठिकाना ढूढ कर इस जंगल से पलायन कर रहे बता दे आज की स्थिती मे जंगलो मे तीर घनूस कुल्हाडी गुलेल से लेस ग्रामीण अराम से जंगलो मे विचरण करते नजर आ जाते है जहा वन्य प्राणी आपने आप को असुरक्षित महसूस करते यहा से विलुप्त हो रहे ।
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वन विभाग द्वारा हर वर्ष जंगलो मे वन्य प्राणीयो के लिये नये तलाब तलाब गहरीकरण जल संवर्धन के लिये जंगलो के नदियो मे स्टाप डैम व कई प्रकार के वन्य प्राणीयो के लिये लाखो खर्च कर विकास कार्य किये जाते है जो सिर्फ कागजो तक ही सिमट कर वह जाती है ये निर्माण कार्य कर्मचारियो के भ्रष्टचार की भेट चढ जाती है या फिर ये निर्माण कार्य सिर्फ दिखावा रह जाता है जो एक बारिश मे ही अपना रूप दिखा देती है और गर्मी लगते ही यहा पानी का नामोनिशान नही बचता धमतरी के जंगलो को तेन्दुआ ,निलगाय, हिरण , साभर; जंगली सुअर, खरगोश, लकडबग्घा के नाम से जाना जाता था और यहा ये बहुतायत मात्रा मे भी पाया जाता है जिसकी वन विभाग द्वारा जनगणना कर जंगली जानवरो की पुष्टी की जाती थी मगर लंबे समय से वन विभाग द्वारा यहा अब तक वन्य प्राणीयो की जनगणना रिपोर्ट की जानकारी भी नही दि जाती और अब तो यहा जंगलो मे वन्य प्राणी की मौजूदगी के अह्सास भी नही होते ।
जब भी किसी वन्य प्राणी की शिकार होती है चाहे शिकारी करे या अवारा कुत्ते मामला सार्वजनिक होते ही वन विभाग द्वारा मामले की पुष्टी की जाती है या फिर चारे व पानी के तलाश मे वन्य प्राणी व हिसंक प्राणी ग्राम तक पहुचते है और वे भटकते हुए फंस जाते है तो ही इनकी पुष्टी होती है ।


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