‘भूत बंगला’ बनाम देओल की फिल्म—अप्रैल रिलीज में बॉक्स ऑफिस टकराव तय, पर कहानी में है पेंच

‘भूत बंगला’ बनाम देओल की फिल्म—अप्रैल रिलीज में बॉक्स ऑफिस टकराव तय, पर कहानी में है पेंच

 साल 2026 के शुरुआत तीन महीने बॉलीवुड वालों के लिए सॉलिड रहे हैं. अबतक जितनी भी फिल्में रिलीज हुई हैं. उनमें से रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ ने सबसे ज्यादा बिजनेस किया है.हालांकि, अप्रैल की शुरुआत हो चुकी है, इस महीने में भी कई बड़ी फिल्में आने वाली हैं. इसी महीने अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ भी आ रही है, जिसकी रिलीज डेट बदलकर अब 17 अप्रैल हो चुकी है. वहीं, 23 अप्रैल को Ginny Wedss Sunny 2 आ रही है, जो कि अविनाश तिवारी और मेधा शंकर की अपकमिंग रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है. इसी बीच जानकारी मिली कि यह देओल भी अप्रैल में आने की प्लानिंग कर चुका है. हालांकि, असली दांव अनुराग कश्यप ने खेला है. जानिए क्या?

साल 2009 में रोमांटिक ड्रामा फिल्म DEV.D रिलीज हुई थी. जिसे अनुराग कश्यप ने लिखा और डायरेक्ट किया था. साथ ही यह शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के 1917 के बंगाली नॉवल देवदास की मॉर्डन डे अडेप्शन थी. जिसमें अभय देओल, माही गिल और कल्कि कोचलिन ने काम किया. फिल्म की कहानी पंजाब और दिल्ली पर बेस्ड थी. 11 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 20.82 करोड़ रुपये का कारोबार किया है. साथ ही अब यह री-रिलीज होने जा रही है.

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अक्षय के पीछे-पीछे कौन ला रहा फिल्म?

दरअसल ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से पहले ‘देव डी’ ही वो फिल्म थी, जिसमें अनुराग कश्यप का काम देख जनता क्रेजी हो गई. इस फिल्म ने एक कल्ट फॉलोइंग हासिल की. जिसे रिलीज हुए 17 साल हो चुके हैं. हाल ही में पता लगा कि 24 अप्रैल को सिनेमाघरों में DEV.D दोबारा रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है. अभय देओल, कल्कि कोचलिन और माही गिल की फिल्म दोबारा बड़े पर्दे पर लगने वाली है. लेकिन सिर्फ कुछ ही सिनेमाघरों में. तो क्लैश का भी किसी को कोई नुकसान नहीं होगा. अनुराग ने कहा था कि- देव डी को बड़े पर्दे पर वापस देखना एक खास अनुभव है. यह एक ऐसी फिल्म है जिसे सामूहिक रूप से अनुभव किया जाना चाहिए. जिसमें अमित त्रिवेदी का म्यूजिक और राजीव रवि की सिनेमैटोग्राफी कहानी को आगे बढ़ाती है.

वहीं, कल्कि कोचलिन ने कहा था कि, ”मुझे याद है कि मैं अपनी हिंदी लाइनों को लेकर इतनी घबराई हुई थी. सेट पर हर सुबह, मैं सही बोलने के लिए देवनागरी में प्रैक्टिस करती थी. फिल्म की शूटिंग का सबसे अच्छा हिस्सा यह था कि फिल्ममेकिंग के बारे में कुछ भी पता नहीं था. क्योंकि इसका मतलब था कैमरा एंगल या कैमरे पर मैं कैसी दिख रही हूं, इसकी परवाह किए बिना ही काम करते जाना.








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