नई दिल्ली : देशभर के 261 मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) से जहरीले और अमानवीय माहौल की 404 शिकायतें की हैं। इनमें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक उत्पीड़न के साथ-साथ शैक्षणिक सुविधाओं की कमी की बातें शामिल हैं।कई शिकायतों में सीनियर छात्रों और शिक्षकों द्वारा घरेलू कार्यों के लिए मजबूर करने का आरोप भी लगाया गया है। छात्रों का कहना है कि तीन साल का पीजी पाठ्यक्रम मानसिक प्रताड़ना का अड्डा बन गया है।
छात्रों ने क्या आरोप लगाए?
रायपुर मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के छात्रों का आरोप है कि उन्हें रोज सीनियर डाक्टरों के लिए अपने खर्च पर चाय-नाश्ता लाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश में 40 से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं। मेरठ के सुभारती मेडिकल कालेज के एक जूनियर डॉक्टर ने 96 घंटे तक लगातार ड्यूटी कराने की शिकायत की है।उसने लिखा है कि सीनियर्स इतने निर्दयी हैं कि उसे खाना खाने के लिए मेस तक नहीं जाने दिया गया, जबकि कर्नाटक के एक मेडिकल कॉलेज में छात्रों को 10 दिनों तक नहाने का समय भी नहीं मिल पाता।
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रैगिंग और अपशब्दों से आत्महत्या करने की सोचते हैं छात्र
चेन्नई के श्री सत्य साईं मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष पर आरोप है कि वे छात्रों पर इतना दबाव डालते हैं कि कई छात्र कोर्स बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। वे कम अंक देने की धमकी देते हैं, जिससे छात्र गंभीर मानसिक तनाव में आकर आत्मघाती विचार तक करने लगते हैं।
इसी तरह अहमदाबाद के एक मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक्स विभाग में रैगिंग की शिकायत सामने आई हैं। आरोप है कि जूनियर छात्रों को सड़ा हुआ भोजन खाने और शराब पीने के लिए मजबूर किया गया। उनके परिवार के लिए अपशब्द कहे गए और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।
सबसे ज्यादा शिकायतों वाले राज्य
इस प्रकार की शिकायतें अधिक
छत्तीसगढ़ के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने कहा है कि रायपुर मेडिकल कालेज में जूनियर डाक्टर एसोसिएशन ने रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न और भेदभाव के खिलाफ निगरानी टीम बनाई है, जो शिकायतों को तुरंत प्रशासन तक पहुंचाकर कार्रवाई सुनिश्चित करती है।


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