बिलासपुर :कागज़ों में अटके राजस्व मामलों को अब गांव की चौपाल पर निपटाने की तैयारी है। राजस्व पखवाड़े के तहत प्रशासन 7 अप्रैल को जिले के 42 गांवों में एक साथ शिविर लगाकर लंबित प्रकरणों का मौके पर निराकरण करेगा। लक्ष्य साफ है—लोग दफ्तर न आएं, समाधान उनके पास पहुंचे।
प्रथम चरण 1–15 अप्रैल में चल रहे इस अभियान के तहत बिलासपुर तहसील के खैरा (ल.), उरतुम और कुदुदंड में शिविर लगेंगे। बेलतरा के कोरबी और बसहा, मस्तूरी के मस्तूरी व किरारी, सीपत के सोंठी और बिटकुला, पचपेड़ी के कोकड़ी, जलसो और बोहारडीह में भी टीम तैनात रहेगी।
तखतपुर के जरौंधा, नगोई, कंचनपुर और विजयपुर, सकरी के सैदा, पांड, अमेरी और हाफा, जबकि बिल्हा के केशला, गुमा परसदा, अमेरी अकबरी, दगौरी और करही में भी शिविर लगाकर सीधे सुनवाई की जाएगी। इसी कड़ी में बोदरी के सारधा, कोटा के पटैता, नेवसा, शिवतराई और सरईपाली, बेलगहना के टेंगनमाड़ा और छतौना, तथा रतनपुर के पुडू, कुम्हड़खोल, लमनाझार, रिंगवार, पीपरपारा, जोगीपुर, छेरकाबांधा और खरगहनी शामिल हैं।
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अभियान की खास बात यह है कि केवल आवेदन लेने तक बात नहीं रुकेगी—अविवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, नक्शा बंटांकन और व्यपवर्तन जैसे मामलों का मौके पर ही निपटारा किया जाएगा। फौती नामांतरण, बंटवारा और अभिलेख त्रुटि सुधार के प्रकरणों का ऑनलाइन पंजीयन, नोटिस जारी कर सुनवाई और आदेश भी शिविर स्थल पर ही किए जाएंगे।
राजस्व पखवाड़ा तीन चरणों में चल रहा है—पहला 1 से 15 अप्रैल, दूसरा 4 से 18 मई और तीसरा 1 से 15 जून तक। हर चरण में अलग-अलग गांवों को कवर कर लंबित मामलों को शत-प्रतिशत निपटाने का लक्ष्य रखा गया है।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपने दस्तावेजों के साथ शिविर में पहुंचें, ताकि वर्षों से लंबित मामलों का उसी दिन समाधान मिल सके।


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