करेला भले ही स्वाद में कड़वा होता है, लेकिन सेहत के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं माना जाता. खासकर गर्मियों के मौसम में इसकी मांग बाजार में तेजी से बढ़ जाती है. यही वजह है कि किसान इसकी खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. हालांकि, अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी के लिए सही तकनीक अपनाना बेहद जरूरी है. इसी कड़ी में देवघर के कृषि विशेषज्ञ ने करेले की आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी है, जिसे अपनाकर किसान अपनी पैदावार बढ़ा सकते हैं.
देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव के अनुसार, यदि करेले की खेती ग्रीन हाउस में की जाए तो उत्पादन में काफी बढ़ोतरी होती है. गर्मी के मौसम में पौधों को अधिक पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन ग्रीन हाउस में सीधे सूर्य की किरणें नहीं पड़तीं. इससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है. साथ ही, नियंत्रित वातावरण मिलने के कारण फसल पर मौसम का नकारात्मक प्रभाव कम पड़ता है और उपज बेहतर होती है. सही तरीके से ग्रीन हाउस का उपयोग करने पर किसान कम जगह में भी अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
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ग्रीन हाउस में करेले की खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तैयारी जरूरी होती है. यदि ग्रीन हाउस के अंदर ही मचान बनाकर खेती की जाए तो मुनाफा और बढ़ सकता है, क्योंकि जमीन पर रहने से फलों के सड़ने की संभावना अधिक रहती है. इसके लिए सबसे पहले ऊंची और लंबी क्यारियां बनाकर उन्हें समतल किया जाता है.
इसके बाद प्रति वर्ग मीटर लगभग 5 किलो गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. मिट्टी को रोगमुक्त करने के लिए एक लीटर पानी में 2 से 4 मिलीलीटर फॉर्मेल्डिहाइड या दो चम्मच कार्बेन्डाजिम मिलाकर छिड़काव किया जाता है. इसके बाद खेत को प्लास्टिक से ढककर करीब दो सप्ताह के लिए छोड़ दिया जाता है, ताकि मिट्टी में मौजूद कीट और रोग नष्ट हो जाएं.
बेहतर उत्पादन के लिए ग्रीन हाउस के अंदर तापमान और नमी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है. दिन के समय तापमान 20 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए, जबकि रात में यह 16 से 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहना चाहिए. वहीं, नमी का स्तर 60 से 80 प्रतिशत के बीच रखना उपयुक्त माना जाता है. इससे पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और फल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
करेले की बुवाई के लिए किसान दो तरीके अपना सकते हैं. पहला, बीजों को सीधे क्यारियों में बोया जाए. दूसरा, पहले नर्सरी में पौध तैयार कर उसे ग्रीन हाउस में रोपा जाए. नर्सरी तैयार करने के लिए प्लास्टिक ट्रे (प्रो-ट्रे) या छोटे पॉलीथीन बैग का उपयोग किया जा सकता है. जब पौधे तैयार हो जाएं, तब उन्हें मुख्य खेत में रोप दिया जाता है.
यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से ग्रीन हाउस में करेले की खेती करें, तो उन्हें न केवल अच्छी पैदावार मिलेगी, बल्कि बाजार में बेहतर कीमत भी प्राप्त हो सकती है. सही तकनीक और उचित देखभाल के साथ करेले की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है.


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