शाहपुर प्रखंड के एक साधारण किसान हरेराम महतो ने अपनी मेहनत और नवाचार के दम पर खेती को नया आयाम दे दिया है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी नई राह खोल दी है। भूमिहीन होने के बावजूद हरेराम महतो ने हार नहीं मानी।उन्होंने मठिया क्षेत्र में करीब तीन एकड़ जमीन पट्टे पर लेकर सब्जियों की नर्सरी तैयार करने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और आज उनकी नर्सरी क्षेत्र में पहचान बना चुकी है।
हरेराम महतो की खासियत यह है कि वे पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं हैं। वे सर्दियों में मौसम के अनुसार विभिन्न प्रकार की सब्जियों जैसे फूलगोभी, बंदगोभी, टमाटर, बैंगन, मिर्च और प्याज की उन्नत किस्मों की नर्सरी तैयार करते हैं। उनकी नर्सरी की मांग इतनी अधिक है कि आसपास ही नहीं, दूर-दराज के किसान भी पौधे खरीदने उनके खेत तक पहुंचते हैं।
फिहलाल उनके खेतो में जेठुआ नेनुआ, भिंडी, बोरो, टमाटर सब्जियां लगी है जिससे प्रत्येक दिन अच्छी आमदनी हो रही हैं। सिर्फ नर्सरी बेचना ही उनका उद्देश्य नहीं है। वे किसानों को यह भी बताते हैं कि बेहतर उत्पादन के लिए नर्सरी कैसे तैयार की जाए। पौधों की देखभाल कैसे की जाए और कम लागत में अधिक मुनाफा कैसे कमाया जा सकता है।
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यही वजह है कि उनका खेत अब सीखने की जगह बन गया है। जहां हर दिन किसानों की आवाजाही बनी रहती है। हरेराम महतो की दिनचर्या भी प्रेरणादायक है। सुबह की पहली किरण के साथ वे खेतों में पहुंच जाते हैं और पूरे दिन मेहनत में जुटे रहते हैं।
परिवार के सदस्य भी उनके इस काम में बराबरी से सहयोग करते हैं। उनकी इस मेहनत का नतीजा है कि वे हर साल लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं। खेती के साथ-साथ उनके परिवार ने शाहपुर में कृषि ग्रीन सेंटर खोलकर बीज बिक्री का काम भी शुरू कर दिया है। जिससे उनकी आय के स्रोत और बढ़ गए हैं।
कृषि क्षेत्र से जुड़े अधिकारी और स्थानीय किसान भी हरेराम महतो के प्रयासों की सराहना करते हैं। उनका मानना है कि अगर अन्य किसान भी इसी तरह नई तकनीकों को अपनाएं, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।आज हरेराम महतो न सिर्फ एक सफल किसान हैं। बल्कि उन किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो कम संसाधनों के कारण खेती में आगे बढ़ने से हिचकते हैं।


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