स्वास्थ्य व्यवस्था पर कलेक्टर का सख्त एक्शन- लापरवाही पर वेतन रोकने तक की चेतावनी

स्वास्थ्य व्यवस्था पर कलेक्टर का सख्त एक्शन- लापरवाही पर वेतन रोकने तक की चेतावनी

कोरिया : जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य समिति की महत्वपूर्ण बैठक में कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों को कड़े निर्देश देते हुए साफ कहा कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह, सिविल सर्जन सह अधीक्षक डॉ. आयुष जायसवाल, डीपीएम सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।कलेक्टर ने जिलेभर से आए ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों, विकासखण्ड कार्यक्रम प्रबंधकों (बीपीएम), सुपरवाइजर, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, मितानिनों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर जमीनी हकीकत को परखा।

कलेक्टर ने विशेष रूप से संस्थागत प्रसव और कम वजन वाले नवजात शिशुओं के मामलों की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर किन कारणों से बच्चों का वजन कम हो रहा है और गर्भवती महिलाओं की देखभाल में कहां कमी रह जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच और उचित पोषण ही स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु की नींव है।

इस दौरान कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला की नियमित एएनसी जांच सुनिश्चित की जाए, जिसमें हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप, एचआईवी, थायराइड, शुगर, यूरिन टेस्ट, वजन और ब्लड प्रेशर जैसी सभी आवश्यक जांच शामिल हों। उन्होंने कहा कि ये सभी जांच गर्भावस्था के पहले तीन महीनों से लेकर नौवें महीने तक नियमित रूप से की जानी चाहिए, ताकि किसी भी जोखिम की समय रहते पहचान कर उचित उपचार किया जा सके।

ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है

कलेक्टर ने स्वास्थ्य कर्मियों व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ को निर्देशित किया कि वे गर्भवती महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित करें तथा आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां डॉक्टर की निगरानी में समय-समय पर उपलब्ध कराएं। साथ ही, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने और ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने पंजी और रजिस्टरों की मौके पर जांच भी की। इस दौरान कई स्थानों पर जानकारी का सही संधारण नहीं पाए जाने पर उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड संधारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर मानी जाएगी।

कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया कि ऐसे बीएमओ, बीपीएम और अन्य कर्मचारी जो अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे हैं, उन्हें तत्काल नोटिस जारी किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर उनका वेतन भी रोका जाए। जिला अस्पताल में कार्यरत एक काउंसलर द्वारा लापरवाहीपूर्वक जानकारी दर्ज करने पर भी उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

बैठक में कलेक्टर ने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को चेतावनी देते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सतत निगरानी, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की हिदायत देते हुए कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं ही जिले के समग्र विकास की आधारशिला हैं। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, बड़ी संख्या में डॉक्टर भी उपस्थित रहे।








You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments