छत्तीसगढ़ के DIG डॉ. संतोष कुमार सिंह की पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना, PMO-NSA से मिला प्रशंसा पत्र

छत्तीसगढ़ के DIG डॉ. संतोष कुमार सिंह की पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना, PMO-NSA से मिला प्रशंसा पत्र

नई दिल्ली/रायपुर:  छत्तीसगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एवं डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) डॉ. संतोष कुमार सिंह को उनकी शोधपरक पुस्तक के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सराहना मिली है। उनकी पुस्तक को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) कार्यालय से प्रशंसा पत्र प्राप्त हुए हैं, जिसे राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधान सचिव-2 शशिकांत दास ने 12 मार्च 2026 को भेजे अपने पत्र में डॉ. सिंह को उनकी पुस्तक “Institutionalization of Peacebuilding: Functioning of United Nations Peacebuilding Commission in Sierra Leone & Burundi” के लिए धन्यवाद देते हुए बधाई दी। उन्होंने लिखा कि यह पुस्तक अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक योगदान है। उन्होंने डॉ. सिंह के समर्पण और गहन अध्ययन की सराहना करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण प्रकाशन बताया।

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इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 23 मार्च 2026 को भेजे अपने पत्र में पुस्तक को अत्यंत शोधपूर्ण और विश्लेषणात्मक बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक संयुक्त राष्ट्र के पीसबिल्डिंग कमीशन की कार्यप्रणाली, उसके संस्थागत ढांचे और शांति स्थापना में उसकी भूमिका को गहराई से समझाती है।

अजीत डोभाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि पुस्तक में विशेष रूप से सिएरा लियोन और बुरुंडी जैसे देशों में संयुक्त राष्ट्र के शांति प्रयासों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा व्यवस्था को समझने में सहायक है। उन्होंने यह भी कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विकसित अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना तंत्र को वर्तमान वैश्विक संघर्षों और चुनौतियों के संदर्भ में समझने के लिए इस तरह के अध्ययन अत्यंत उपयोगी हैं।दोनों उच्च स्तरीय अधिकारियों ने डॉ. सिंह के इस प्रयास को सराहनीय बताते हुए उनके अकादमिक और पेशेवर जीवन में निरंतर सफलता की कामना की है।

गौरतलब है कि डॉ. संतोष कुमार सिंह वर्तमान में सीआईएसएफ मुख्यालय, दिल्ली में डीआइजी के पद पर पदस्थ हैं। उनकी इस उपलब्धि को न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गौरवपूर्ण माना जा रहा है। उनकी पुस्तक अंतरराष्ट्रीय संबंधों, शांति स्थापना और संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर शोध करने वाले विद्यार्थियों और विशेषज्ञों के लिए भी उपयोगी मानी जा रही है।








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