छत्तीसगढ़ में खनन पर ड्रोन की नजर: अवैध माइनिंग पर लगेगी लगाम

छत्तीसगढ़ में खनन पर ड्रोन की नजर: अवैध माइनिंग पर लगेगी लगाम

रायपुर : छत्तीसगढ़ में खदानों की निगरानी अब हाईटेक होने जा रही है. प्रदेश में अवैध खनन और ओवर माइनिंग पर लगाम के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा. प्रमुख खदानों और आसपास ड्रोन कैमरे तैनात किए जाएंगे. ये कैमरे एरियल सर्वे और 3डी मैपिंग के जरिए खदानों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे.

ड्रोन से खदानों का ऊपर से लगातार सर्वे किया जाएगा. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि तय लीज क्षेत्र के भीतर ही खनन हो रहा है या सीमा से बाहर भी खुदाई की जा रही है. समय-समय पर मिलने वाले डेटा की तुलना कर ओवर माइनिंग यानी तय सीमा से अधिक खनिज निकालने की गतिविधियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा. फिलहाल विभाग शुरुआती चरण में पांच ड्रोन कैमरे तैनात करने जा रहा है. इन्हें सर्विस मोड पर लिया जाएगा और इनके संचालन के लिए विशेषज्ञों की टीम भी तैनात रहेगी. ड्रोन को खासतौर पर रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, बिलासपुर इत्यादि जिलों की खदानों में लगाया जाएगा, जहां अवैध खनन की शिकायतें ज्यादा सामने आती रही हैं. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दुर्गम इलाकों जैसे जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में भी निगरानी आसान हो जाएगी. यहां फिलहाल पारंपरिक निरीक्षण में समय और संसाधन ज्यादा लगते हैं. ड्रोन से मिलने वाली हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरें और मैपिंग डेटा सीधे विभाग तक पहुंचेगा, जिससे तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी.

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परिवहन गाड़ियों की डिजिटल निगरानी

खनिज परिवहन को पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए 10 प्रमुख परिवहन रूट्स पर ई-चेक गेट सिस्टम लागू करने जा रहा है. यह पूरी तरह डिजिटल एंट्री-एग्जिट सिस्टम होगा. इसमें खदान से निकलने वाले हर ट्रक या वाहन का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार होता है. जैसे ही वाहन चेक गेट से गुजरता है, उसकी जानकारी जैसे वाहन नंबर, खनिज का प्रकार, मात्रा और गंतव्य इत्यादि सिस्टम में दर्ज हो जाएगी. इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ओवरलोडिंग और बिना रॉयल्टी खनिज परिवहन पर रोक लगाई जा सकती है. पहले जहां कागजी दस्तावेजों के जरिए हेरफेर की गुंजाइश रहती थी, वहीं अब डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होने से गड़बड़ी पकड़ना आसान हो जाएगा. ई-चेक गेट रियल टाइम ट्रैकिंग की सुविधा भी देता है. अधिकारी किसी भी समय यह देख सकते हैं कि कौन सा वाहन कहां से निकला और कहां तक पहुंचा. इससे अवैध खनिज परिवहन और टैक्स चोरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाता है.

इन रूपों में होता है अवैध खनन

1. बिना लीज/परमिट के खनन : जमीन पर खनन शुरू कर दिया, लेकिन सरकार से अनुमति नहीं ली.
2. लीज एरिया से बाहर खनन : जहां तक खनन की इजाजत है, उससे बाहर खुदाई करना.
3. ओवर माइनिंग : तय सीमा से ज्यादा खनिज निकालना.
4. बिना रॉयल्टी/टैक्स के परिवहन : खनिज निकालकर बिना सरकारी शुल्क दिए बेच देना.
5. फर्जी कागजों से खनन : नकली परमिट या ट्रांजिट पास का इस्तेमाल.

विभाग में अन्य कई प्रावधान

  1. खनिज नियमों में संशोधन कर रेत व गौड़ खनिजों के अवैध उत्खनन पर न्यूनतम 25 हजार रुपए जुर्माना
  2. माइनिंग सर्विलांस सिस्टम और सैटेलाइट मॉनिटरिंग से खदानों की रियल टाइम निगरानी कर कार्रवाई
  3. खनिज परिवहन में ऑनलाइन ट्रांजिट पास अनिवार्य किया गया, जिससे 5 साल में 84.47 करोड़ की वसूली

सचिव खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन को रोकने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर सख्त कदम उठाए गए हैं. खदानों की निगरानी और अवैध परिवहन रोकने के लिए ड्रोन कैमरे से निगरानी और ई-गेट चालान सिस्टम शुरू किया जा रहा है.








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