बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के किसान अमरूद की एक ऐसी किस्म की बागवानी कर रहे हैं, जिसका फलन साल में तीन बार होता है. सबसे बड़ी बात यह है कि पौधा रोपण के पहले साल में ही पौधों में फल आना शुरू हो जाता है. हालांकि उस समय फल लेना पौधे की सेहत के लिए सही नहीं होता है. इसलिए किसान भाई दूसरे फलन से हार्वेस्टिंग का सिलसिला शुरू करते हैं. ऐसे में आज हम आपको इस लेख में अमरूद की इस खास किस्म की खेती के बारे में बताएंगे कि इसमें आने वाली लागत और होने वाली आमदनी कितना है. आइये जानते हैं इसकी खेती के बारे में.
पौधा लगाने के पहले साल से शुरू हो जाता है फलन
जिले के मझौलिया प्रखंड स्थित बनकट मुसहरी गांव निवासी और कृषि सलाहकार रविकांत पांडे बताते हैं कि ‘जैपनीज रेड डायमंड’ अमरूद की एक ऐसी प्रजाति है, जिसकी खेती किसी भी किसान को दूसरे किसी भी फल की तुलना में बढ़िया लाभ दिला सकती है. वैसे तो इसमें पौधा रोपण के 8वें महीने से ही फल निकलना शुरू हो जाता है, लेकिन दूसरे साल से हर पौधे से कम से कम 12 किलो तक अमरूद का फलन मिलने लगता है.
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1 एकड़ में लग जाते हैं 400 पौधे
रविकांत ने बताया कि जिले के योगपट्टी प्रखंड निवासी सुरेंद्र पांडे ने इसकी बागवानी की है. उन्होंने 1 एकड़ में करीब 400 पौधों को लगाया था. जहां पौधों की खरीदारी और फलन की स्थिति तक उसमें लगभग डेढ़ लाख रुपए का खर्च आया. पहले वर्ष में सुरेंद्र ने फलों को बड़ा होने से पहले उसे तोड़कर हटा दिया, ताकि पौधों पर भर न पड़े. दूसरे साल में पौधे बड़े हो चुके थे और और उनसे फलन भी बेहतरीन हुई. एवरेज लेकर चलें तो हर पौधे से 10 किलो अमरूद की हार्वेस्टिंग सफलता पूर्वक हुई है.
हर पौधे से 40 किलो तक अमरूद का फलन है संभव
इस प्रकार एक एकड़ में लगे सभी पौधों से करीब 3500 किलो अमरूद की हार्वेस्टिंग संभव हो सकी. यह कहानी अभी यहीं तक आकर नहीं रुकी. रविकांत बताते हैं कि तीसरे वर्ष पौधे अपनी मेच्योरिटी की पीक पर पहुंच गए. अब हर पौधे पर 35 से 40 किलो तक अमरूद का फलन होने लगा था. ऐसे में तीसरे वर्ष सुरेंद्र ने अपने बागीचे से एक टन से अधिक अमरूद की हार्वेस्टिंग की. जिसे बाज़ार में 60 रुपए किलो की भाव से बेचा गया.
साल में तीन बार फलन है संभव
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अमरूद की यह किस्म साल में 3 बार फलन की अवस्था में रहती है. पौधा रोपण के तीसरे वर्ष से किसान हर बार फलों की हार्वेस्टिंग कर सकते हैं और उसे बाजार में बेच सकते हैं. पूरी तरह से गोल, आकार में बड़ा और स्वाद में मीठा होने की वजह से बाजार में इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है.


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