हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी तो खुद भगवान विष्णु के सबसे मनमोहक रूप से जुड़ी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन प्रभु ने मोहिनी रूप धारण कर असुरों से अमृत की रक्षा की थी। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पापों का अंत हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
हालांकि, एकादशी का व्रत जितना फलदायी है, इसके नियम उतने ही कठिन हैं। अनजाने में किया गया गलत खान-पान आपके पूरे दिन की तपस्या को खत्म कर सकता है। अगर आप भी इस साल मोहिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो इन चीजों का ध्यान जरूर रखें।
क्या न खाएं?
चावल का त्याग
एकादशी के दिन चावल खाना सबसे बड़ा पाप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल में 'महर्षि मेधा' के अंश का वास होता है। इस दिन चावल का सेवन करना जीव हत्या के समान माना गया है। चाहे आप व्रत रख रहे हों या नहीं, एकादशी पर घर में चावल नहीं बनाना चाहिए।
अनाज और दालों से बनाएं दूरी
मोहिनी एकादशी के दिन गेहूं, जौ, मक्का और सभी प्रकार की दालों का सेवन वर्जित है। ऐसे में व्रत के दौरान केवल फलाहार का ही सेवन करना चाहिए। अगर आप पूर्ण निर्जला या फलाहारी व्रत नहीं कर पा रहे हैं, तो कुट्टू का आटा या सिंघाड़े के आटे का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन सामान्य अनाज को हाथ भी न लगाएं।
तामसिक भोजन
प्याज और लहसुन को तामसिक माना गया है। ये भोजन मन में आलस्य पैदा करते हैं, जो एकादशी की सात्विकता को खत्म करता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस दिन सादे और बिना प्याज-लहसुन वाले भोजन का सेवन करना चाहिए।
शहद और बैंगन का परहेज
बहुत कम लोग जानते हैं कि एकादशी पर शहद का सेवन भी वर्जित है। शहद को कई बार तामसिक चीजों में गिना जाता है। इसके अलावा, शास्त्रों में एकादशी के दिन बैंगन, सेम की फली और पत्तेदार सब्जियां खाना भी वर्जित बताया गया है।
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
मांस-मदिरा
धार्मिक अनुष्ठान में मांस और मदिरा का सेवन बहुत बड़ा पाप माना जाता है। मोहिनी एकादशी पर मन, कर्म और वचन की पवित्रता जरूरी होती है। इस दिन किसी की बुराई करना या क्रोध करना भी व्रत को खंडित कर सकता है।
क्या खाएं?


Comments