परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद /छुरा :केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। इस योजना के तहत गांव-गांव में पानी टंकी निर्माण, पाइपलाइन विस्तार और घर-घर नल कनेक्शन के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।क्षेत्र के कई गांवों में आज भी लोग पीने के पानी के लिए जूझ रहे हैं। योजना के तहत किए गए कार्य अधूरे पड़े हैं और जहां निर्माण पूरा भी हुआ है, वहां पानी सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। न तो ठेकेदारों का कोई अता-पता है और न ही संबंधित विभागीय अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान दे रहे हैं।
अगर ग्राम पंचायत भरूवामुड़ा की बात करें, तो यहां के हीराबतर, जटियातोरा, पंडरीपानी और भरूवामुड़ा गांवों में जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई नल-जल टंकियां पिछले दो वर्षों से शोपीस बनकर खड़ी हैं। कहीं टंकी निर्माण अधूरा है, तो कहीं पाइपलाइन बिछाने का काम अधर में लटका हुआ है। कई जगह बोरिंग और पंप की व्यवस्था भी अधूरी है, जिससे पूरे सिस्टम का संचालन ही शुरू नहीं हो पाया है। वहीं ग्राम हीराबतर के आश्रित कमार पारा जो हीराबतर से लगभग दो किलोमीटर दूर है जहां पाईप लाईन तो बिछा दिया गया है लेकिन वहां अलग से पानी टंकी नहीं है और नहीं जल स्रोत आखिर वहां पानी की आपूर्ति कैसे होगा ये अभी भगवान भरोसे है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। दूर-दराज के जल स्रोतों से पानी लाना उनकी मजबूरी बन गई है। महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि योजना में भारी लापरवाही और अनियमितताएं हुई हैं। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि लोगों को पानी नसीब नहीं हो रहा, तो यह शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द अधूरे कार्यों को पूर्ण कराया जाए, दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा गांवों में नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
पीएचई विभाग राजिम के अधिकारी नवीन साहू से जानकारी लेने पर ने कहा कि जल स्रोत की कमी है ग्राम हीराबतर,जटियातोरा, और पंडरीपानी कमार का स्रोत के लिए ऊपर रिपोर्ट भेज दिया गया है। वहीं ग्राम भरुवामुड़ा का टंकी निर्माण का कार्य जारी है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेते हैं और प्यासे गांवों को राहत मिल पाती है या नहीं।


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