खैरागढ़ में बड़ी कार्रवाई: PCPNDT एक्ट के तहत बालाजी डायग्नोस्टिक सेंटर का सोनोग्राफी कक्ष सील

खैरागढ़ में बड़ी कार्रवाई: PCPNDT एक्ट के तहत बालाजी डायग्नोस्टिक सेंटर का सोनोग्राफी कक्ष सील

खैरागढ़ : स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने खैरागढ़ में संयुक्त कार्रवाई करते हुए बालाजी डायग्नोस्टिक सेंटर के सोनोग्राफी कक्ष को सील कर दिया है। यह कार्रवाई PCPNDT Act 1994 के तहत की गई है, जिसमें भ्रूण लिंग जांच पर पूरी तरह प्रतिबंध है और रिकॉर्ड से लेकर प्रक्रिया तक हर स्तर पर सख्त नियम लागू होते हैं।

जानकारी के अनुसार 12 मार्च को प्रशासनिक टीम द्वारा सेंटर का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान अधिनियम और नियमों के उल्लंघन से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें दस्तावेजों के रखरखाव और प्रक्रियात्मक कमियां प्रमुख बताई जा रही हैं। निरीक्षण रिपोर्ट समुचित प्राधिकारी और कलेक्टर को सौंपी गई, जिसके बाद सेंटर संचालक और संबंधित रेडियोलॉजिस्ट को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।

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मामले की समीक्षा जिला सलाहकार समिति द्वारा की गई, लेकिन सेंटर की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद समिति ने नियमानुसार सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की। इसी के आधार पर 21 अप्रैल को गठित टीम ने पीसीपीएनडीटी एक्ट की धारा 30 और नियम 12 के तहत कार्रवाई करते हुए सेंटर के सोनोग्राफी कक्ष को सीलबंद कर दिया और जांच से जुड़े आवश्यक साक्ष्य भी जब्त किए।

पहले भी विवादों में रह चुका है डायग्नोस्टिक सेंटर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह डायग्नोस्टिक सेंटर पहले भी विवादों में रह चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यहां एक महिला के ऑपरेशन के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए थे। हालांकि उस मामले में आधिकारिक जांच का अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया, लेकिन इस घटना ने सेंटर की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े किए थे, ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह सेंटर जांच के घेरे में आ गया है।

नियमों का पालन नहीं करने वालों पर होगी कार्रवाई

प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिले में लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले किसी भी सेंटर के खिलाफ आगे भी इसी तरह कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस कार्रवाई को स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में जांच की प्रगति और प्रशासनिक फैसलों पर इस मामले की दिशा और गंभीरता निर्भर करेगी।








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