बिलासपुर : छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, नियमों और प्रावधान से साफ है, नगर पालिका के कर्मचारी का स्थानांतरण नगर निगम में नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच ने राज्य सरकार के स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया है। कुम्हारी नगर पालिका के सीएमओ का तबादला राज्य सरकार ने रायपुर निगम में कर दिया था।
याचिकाकर्ता सीएमओनेतराम चंद्राकर ने अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता का स्थानांतरण सीएमओ कुम्हारी से जोन कमिश्नर के रूप में नगर निगम रायपुर किया गया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संदीप दुबे ने कोर्ट के समक्ष पैरवी करते हुए कहा, नगर पालिका के अधिकारी व कर्मचारी का स्थानांतरण नगर निगम में नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार को इसका अधिकार नहीं है। नगर पालिका और नगर निगम के लिए अलग-अलग कानून बनाए गए हैं। अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा, स्थानांतरण आदेश राज्य के क्षेत्राधिकार से बाहर होने के कारण स्थानांतरण आदेश को निरस्त करने की मांग की। याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया है।
पढ़िए क्या है मामला?
रिट याचिका में 26 दिसंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके द्वारा याचिकाकर्ता, कुम्हारी नगर परिषद, जिला दुर्ग में मुख्य नगर अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, का तबादला रायपुर नगर निगम, जिला रायपुर में उपायुक्त के पद पर कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त 26 दिसंबर 2024 के आदेश को भी चुनौती दी गई है, जिसके द्वारा सौरभ वाजपेयी का तबादला प्रभारी, मुख्य नगर अधिकारी, नगर परिषद, पाटन, जिला दुर्ग से कुम्हारी नगर परिषद में प्रभारी, मुख्य नगर अधिकारी के पद पर कर दिया गया है।
जानिए नगरपालिका अधिनियम में क्या है व्यवस्था
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संदीप दुबे ने कोर्ट के समक्ष पैरवी करते हुए कहा, याचिकाकर्ता नगरपालिकाओं का कर्मचारी है, इसलिए यदि किसी नगरपालिका के कर्मचारियों का तबादला किया जाना है, तो उन्हें कानून के अनुसार केवल नगर निगम में ही तैनात किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 86 (4) के प्रावधान के अनुसार, राज्य सरकार को नगरपालिका सेवा के किसी भी कर्मचारी को एक परिषद से दूसरी परिषद में स्थानांतरित करने का अधिकार और क्षेत्राधिकार प्राप्त है। अधिनियम, 1961 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि राज्य सरकार कर्मचारी को नगरपालिका से नगर निगम में स्थानांतरित कर सके।
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पालिका से निगम में कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति हो सकती है, स्थानांतरण नहीं कर सकते
अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा, इससे पहले याचिकाकर्ता रायपुर नगर निगम में तैनात थे, लेकिन यह प्रतिनियुक्ति के माध्यम से था क्योंकि नगर निगम एक अलग संगठन है। उन्होंने यह भी तर्क दिया, 07 मार्च्र 2024 के आदेश के अनुसार कुम्हारी नगर पालिका परिषद में उनकी वापसी के कुछ महीनों बाद विवादित स्थानांतरण आदेश पारित किया गया है। उन्होंने प्रस्तुत किया कि आदेश के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है, 07 मार्च 2024 के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है, यदि नगरपालिका के कर्मचारी को नगर निगम में तैनात किया जाना है, तो यह केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से ही हो सकता है, स्थानांतरण द्वारा नहीं। इसलिए, 26.दिसंबर 2024 का वह आदेश, जिसके तहत याचिकाकर्ता का नगर परिषद से नगर निगम में स्थानांतरण और तैनाती प्रशासनिक आधार पर भी अनुमत नहीं है, को रद्द किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने अपने जवाब में ये कहा
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए विधि अधिकारी ने कहा, 1961 के अधिनियम के तहत नगरपालिकाओं के किसी कर्मचारी को नगर निगम में स्थानांतरित करने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा, याचिकाकर्ता एक कर्मचारी है और इसलिए, प्रशासनिक आधार पर किए गए इस स्थानांतरण, पदस्थापन में सामान्य तौर पर हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। याचिकाकर्ता का स्थानांतरण सेवा का एक अभिन्न अंग है और इसलिए, इस रिट याचिका में कोई दम नहीं है और तदनुसार, इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में ये कहा
रिट याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, राज्य सरकार के वकील ने इस बात से इनकार नहीं किया है, याचिकाकर्ता कुम्हारी नगर परिषद का कर्मचारी है। 07 मार्च 2024 के आदेश से स्पष्ट है, याचिकाकर्ता कुम्हारी नगर परिषद का कर्मचारी होते हुए भी रायपुर नगर निगम में जोन कमिश्नर के पद पर प्रतिनियुक्ति पर तैनात था। उसे 07 मार्च 2024 को ही वापस बुलाया गया था। अधिनियम, 1961 की धारा 86 (4) के तहत प्रावधान, जो राज्य सरकार को किसी कर्मचारी का स्थानांतरण करने का अधिकार प्रदान करता है।
नगर पालिका के कर्मचारी को निगम में स्थानांतरण का नहीं है प्रावधान
नगर पालिका परिषद से नगर परिषद में ही कर्मचारियों के तबादले का प्रावधान है। नगर पालिका परिषद के किसी कर्मचारी को नगर निगम में तबादले, पोस्टिंग का कोई प्रावधान नहीं है। नगर निगम अधिनियम, 1956 की धारा 58 (5) के प्रावधान का अवलोकन करने से पता चलता है, यह राज्य सरकार को केवल एक नगर निगम से दूसरे नगर निगम में कर्मचारी के तबादले का अधिकार देता है। अधिनियम, 1961 और अधिनियम, 1956 दोनों में ही एक नगर परिषद से दूसरी नगर परिषद में और नगर निगम से दूसरे नगर निगम में कर्मचारी की पोस्टिंग का स्पष्ट प्रावधान है। दोनों में से किसी भी अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, नगर पालिकाओं के किसी कर्मचारी को तबादले पर नगर निगम में पोस्ट किया जा सके या इसके विपरीत।
राज्य शासन के आदेश को हाई कोर्ट ने किया रद्द
26 दिसंबर 2024 के आदेश से यह स्पष्ट होता है, यद्यपि उसमें नामित कर्मचारियों की नियुक्ति प्रशासनिक आधार पर की गई है, जैसा कि उल्लेख किया गया है, फिर भी यह स्थानांतरण के माध्यम से की गई है। उपरोक्त तथ्यों और ऊपर चर्चा किए गए प्रासंगिक प्रावधानों, विशेष रूप से अधिनियम, 1961 की धारा 86 (4) और अधिनियम, 1956 की धारा 58 (5) के आधार पर, मेरा यह मत है, 26 दिसंबर 2024 के विवादित आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता का स्थानांतरण और रायपुर नगर निगम में उसकी नियुक्ति विधिवत नहीं है और इसलिए यह मान्य नहीं है। तदनुसार, 26 दिसंबर.2024 का आदेश, जहां तक याचिकाकर्ता से संबंधित है, रद्द किए जाने योग्य है और तदनुसार रद्द किया जाता है।


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