कोरिया : झुमका जलाशय की जल गुणवत्ता सुधारने और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक और समयबद्ध कार्ययोजना लागू कर दी है। खदान से निकलने वाले अपशिष्ट जल के कारण उत्पन्न समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सख्ती के साथ सुधारात्मक कदम उठाए हैं, जिनका असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
चरचा आरओ अंडरग्राउंड कोल माइंस (एसईसीएल) से जुड़े इस मामले में अशोधित जल के प्रवाह को लेकर पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर संचालन पर रोक भी लगाई गई थी। इसके बाद खदान प्रबंधन ने सुधारात्मक कार्यों की विस्तृत योजना प्रस्तुत की है। इसमें मौजूदा इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट के साथ 4.5 एमएलडी क्षमता का नया ईटीपी प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है, जिसे 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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22 अप्रैल 2026 को कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में खदान, जल संसाधन और पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने जल गुणवत्ता पर पड़ रहे प्रभावों की गहन समीक्षा की। बैठक में यह तय किया गया कि ईटीपी निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी और टेंडर स्वीकृति के बाद 7 से 8 माह में प्लांट का निर्माण कार्य पूर्ण किया जाएगा।
इसके साथ ही चरचा उपक्षेत्र की लगभग 2200 आवासीय इकाइयों में से पहले चरण में 1100 घरों के एसटीपी कनेक्शन को एक सप्ताह में सुधारने का निर्णय लिया गया है। जहां आवश्यक होगा, वहां सेटलिंग टैंक प्रणाली का उपयोग कर अपशिष्ट जल के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ईटीपी की कार्यक्षमता भी मजबूत होगी। जल गुणवत्ता की निरंतर निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है, जिससे आमजन को वास्तविक समय में जानकारी मिल सके।
बैठक में एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद, जल संसाधन विभाग कोरिया के कार्यपालन यंत्री अगस्टीन टोप्पो, एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के महाप्रबंधक (सिविल) भानू सिंह, एसईसीएल बिलासपुर के महाप्रबंधक (पर्यावरण), सब एरिया प्रबंधक चरचा आरओ यूजी कोल माइन, क्षेत्रीय अधिकारी सीईसीबी अंबिकापुर, जिला खनिज अधिकारी कोरिया सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


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