बिहार के किसान अब पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. इसी कड़ी में छपरा के किसान अब फलों की आधुनिक खेती करके अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. ये अन्य किसानों के लिए भी एक मिसाल पेश कर रहे हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही प्रगतिशील किसान से मिलाने जा रहे हैं. जिन्होंने छपरा की धरती पर ड्रैगन फ्रूट की सफल पैदावार कर सबको हैरान कर दिया है.
कौन हैं यह किसान और कैसे मिली प्रेरणा?
हम बात कर रहे हैं सारण जिले के दरियापुर प्रखंड अंतर्गत खानपुर गांव के निवासी रणजीत सिंह की. रणजीत सिंह ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया. आज उनकी मेहनत रंग ला रही है. रणजीत बताते हैं कि इस अनोखी खेती का विचार उन्हें सोशल मीडिया के जरिए आया. उन्होंने मोबाइल पर यूट्यूब देखते समय ड्रैगन फ्रूट की खेती के फायदे जाने. जिसके बाद उनमें इसे उगाने की इच्छा जागी. शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. जिले में इस फल के पौधे उपलब्ध नहीं थे. रणजीत ने हार नहीं मानी और कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क किया. उनकी रुचि को देखते हुए वैज्ञानिकों ने उन्हें रांची प्रशिक्षण के लिए भेजा. वहां से बेहतर क्वालिटी के पौधे लाकर उन्होंने रोपा. आज परिणाम सबके सामने है.
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खेती का अनूठा डबल प्रॉफिट मॉडल
रणजीत सिंह की खेती का तरीका काफी वैज्ञानिक और मुनाफे वाला है. उन्होंने ड्रैगन फ्रूट के पौधों को 4 फीट की दूरी पर लगाया है. चूंकि ड्रैगन फ्रूट एक कैक्टस प्रजाति का पौधा है. इसलिए इसे सहारे की जरूरत होती है. रणजीत ने सीमेंट के पिलर के चारों ओर पौधे लगाए हैं. रणजीत ने चतुराई दिखाते हुए दो खंभों के बीच खाली बची 4 फीट की जगह का भी इस्तेमाल किया है. इस बीच की जगह में वे पपीता, भिंडी, और हरी मिर्च जैसी सब्जियां उगाते हैं. इससे उन्हें मुख्य फसल के साथ-साथ सब्जियों से भी अतिरिक्त आमदनी होती है.
जैविक विधि से तैयार हो रहा है फल
रणजीत सिंह की पूरी खेती जैविक है. वे किसी भी रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करते. मांझी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के निर्देशानुसार वे जैविक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं. जिससे फल की गुणवत्ता और मिठास बाजार में मिलने वाले अन्य फलों से कहीं बेहतर होती है.
सारण की धरती के लिए क्यों है खास?
सारण जिले में ड्रैगन फ्रूट की खेती अभी शुरुआती दौर में है. यह फल दो किस्मों में आता है सफेद और लाल. रणजीत के बाग में लगे ड्रैगन फ्रूट पौष्टिकता से भरपूर और काफी मीठे हैं. बाजार में एक पीस ड्रैगन फ्रूट की कीमत 150 रुपये से अधिक होती है. रणजीत बताते हैं कि यह पौधा एक साल में करीब 5 बार फलन देता है. उनके अनुसार अगर कोई किसान मात्र 4 कट्ठा जमीन पर इसकी वैज्ञानिक तरीके से खेती करे तो वह साल भर में 3 से 4 लाख रुपये तक की कमाई आसानी से कर सकता है.
किसानों के लिए बन गए मार्गदर्शक
आज रणजीत सिंह की फसल को देखने के लिए जिले के दूर-दराज इलाकों से किसान खानपुर गांव पहुंच रहे हैं. रणजीत न केवल उन्हें अपनी फसल दिखाते हैं. बल्कि उन्हें मुफ्त में ट्रेनिंग और जानकारी भी देते हैं. वे कहते हैं कि खेती अब केवल पेट भरने का जरिया नहीं बल्कि एक शानदार बिजनेस है. पर इसे सही तकनीक और नई सोच के साथ करना होगा.


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