खेती-किसानी में सिर्फ मेहनत ही काफी नहीं है, सही समय पर सही तकनीक का इस्तेमाल भी बहुत जरूरी है. इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के तुरैनी रज्जब गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान राणा चेतन सिंह ने अमरूद की बागवानी में होने वाले घाटे को मुनाफे में बदलने के लिए एक विशेष तकनीक अपनाई है. अक्सर बरसात के मौसम में अमरूद की फसल खराब होने से किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता था, लेकिन अब वैज्ञानिकों के सुझाव पर किसान ने फसल चक्र को नियंत्रित कर सर्दियों में बेहतर पैदावार लेने की तैयारी कर ली है. जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा होगा.
बरसात की फसल बनती थी घाटे का सौदा
किसान राणा चेतन सिंह पिछले कई वर्षों से अमरूद की खेती कर रहे हैं. वह बताते हैं कि गर्मी के मौसम में आने वाले फल जब बरसात तक तैयार होते हैं, तो उनमें कीड़े लगने की समस्या आम हो जाती है. नमी और अधिक बारिश के कारण फलों की गुणवत्ता गिर जाती है, जिससे बाजार में खरीदार नहीं मिलते और दाम भी काफी कम रह जाते हैं. इसके विपरीत, बाजार में सर्दियों के अमरूद की मांग हमेशा अधिक रहती है, लेकिन उस समय तक पेड़ों पर फल कम ही बचते थे.
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अपनी इस समस्या के समाधान के लिए राणा चेतन सिंह ने फरवरी माह में दिल्ली के पूसा में आयोजित राष्ट्रीय कृषि मेले में शिरकत की थी. वहां उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों के समक्ष अपनी चिंता रखी. जहां वैज्ञानिकों ने उन्हें ‘क्रॉप रेगुलेशन’ तकनीक की जानकारी दी. विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसान सही समय पर टहनियों की छंटाई कर दें, तो वे बरसात की खराब फसल को छोड़कर सर्दियों की कीमती और स्वस्थ फसल हासिल कर सकते हैं.
कैसे काम करती है टहनियों की छंटाई की तकनीक
मार्च और अप्रैल माह में जैसे ही अमरूद के पेड़ों पर फल और फूल आने शुरू हों, उन टहनियों को काटकर हटा देना चाहिए. ऐसा करने से पौधे की ऊर्जा बरसात के दौरान नई टहनियां विकसित करने में लगती है. इन नई टहनियों पर जब दोबारा फूल आते हैं, तो उनसे मिलने वाला फल पूरी तरह से सर्दियों की शुरुआत में तैयार होता है. ठंड के मौसम में फल तैयार होने के कारण उनमें कीड़े लगने की गुंजाइश खत्म हो जाती है और फल का स्वाद भी बेहतर होता है.
कम लागत और बेहतर मूल्य से बढ़ेगा मुनाफा
किसान ने बताया कि टहनियों की इस छंटाई में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता है, बस सही समय की पहचान जरूरी है. हालांकि इस प्रक्रिया में फलों की कुल संख्या में थोड़ी कमी आती है, लेकिन गुणवत्ता और आकार में सुधार होने के कारण बाजार में इसके दाम बहुत ऊंचे मिलते हैं. सर्दियों में मिलने वाले बेहतरीन भाव से किसानों की आय में सीधा इजाफा होता है, जिससे खेती घाटे के बजाय मुनाफे का जरिया बन जाती है.
राणा चेतन सिंह को देखकर आसपास के गांवों के अन्य बागवान भी अब अमरूद की खेती में इस वैज्ञानिक तरीके को अपनाने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के साथ खेती करें, तो प्राकृतिक आपदाओं और कीटों के प्रकोप से बचते हुए अच्छा आर्थिक लाभ कमा सकते हैं.


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