कृषि आदान व्यापारियों की देशव्यापी हड़ताल, पीएम मोदी के नाम सौंपा ज्ञापन

कृषि आदान व्यापारियों की देशव्यापी हड़ताल, पीएम मोदी के नाम सौंपा ज्ञापन

जबरन लिंकिंग, कम मार्जिन और पोर्टल बाध्यता से नाराज़ 5 लाख डीलर; समस्याओं के समाधान की मांग तेज

 

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद  : देशभर के कृषि आदान (खाद, बीज एवं कीटनाशक) व्यापारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन (एडा) के बैनर तले आयोजित इस हड़ताल में देशभर के करीब 5 लाख व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की।गरियाबंद जिले में भी कृषि आदान व्यापारियों ने एकजुट होकर जिला कृषि उप संचालक के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया। इस दौरान व्यापारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे पिछले एक दशक से कई व्यावहारिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं की गई है।

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व्यापारियों के अनुसार, जबरन उत्पाद लिंकिंग, कम मार्जिन, महंगी डिलीवरी व्यवस्था और ऑनलाइन पोर्टल की अनिवार्यता जैसी बाध्यताएं उनके व्यवसाय को प्रभावित कर रही हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे विक्रेताओं के लिए डिजिटल पोर्टल पर काम करना कठिन साबित हो रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई है कि सब्सिडी वाले खाद के साथ गैर-जरूरी उत्पादों की जबरन लिंकिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके साथ ही खाद की डिलीवरी सीधे विक्रेताओं के बिक्री केंद्र तक सुनिश्चित करने, डीलर मार्जिन बढ़ाकर न्यूनतम 8 प्रतिशत करने और ‘साथी’ पोर्टल को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक बनाए जाने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है।

इसके अलावा व्यापारियों ने बीज नीति में स्पष्टता लाने की जरूरत बताई है, ताकि अनावश्यक विवादों से बचा जा सके। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि सीलबंद पैकिंग में गुणवत्ता खराब पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी विक्रेता पर न डालकर संबंधित निर्माता कंपनी पर तय की जाए।संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।इस हड़ताल के चलते एक दिन के लिए खाद, बीज और कीटनाशकों की बिक्री प्रभावित रही, जिससे किसानों को भी अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ा। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि यह कदम उनकी मजबूरी है, ताकि सरकार तक उनकी समस्याओं की गंभीरता पहुंच सके।








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