रायपुर : सीएम विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की मीटिंग हुई। वर्ष 1988 बैच के तीन भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों संजय पिल्ले, आरके विज एवं मुकेश गुप्ता के संबंध में पूर्व में जारी पदावनति आदेश 26 सितंबर 2019 का पुनर्विलोकन करते हुए उसे निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही, मंत्रिपरिषद ने 24 सितंबर 2019 को लिए गए संबंधित निर्णय को अपास्त करते हुए, उस निर्णय के पालन में जारी समस्त आदेशों को बैठक से पूर्व की स्थिति में पुनर्जीवित मान्य किया है। यह निर्णय प्रशासनिक तथ्यों एवं परिस्थितियों के समग्र परीक्षण के उपरांत लिया गया है। पूर्ववती सरकार का था निर्णय
कांग्रेस सरकार के समय डीजी के पद पर प्रमोट किए गए तीन आईपीएस अफसरों की पदोन्नति को निरस्त करने का बड़ा फैसला लिया था। भारत सरकार के गृह विभाग द्वारा सहमति नहीं देने के बाद 1988 बैच के आईपीएस संजय पिल्ले, आरके विज और मुकेश गुप्ता की पदोन्नति आदेश को निरस्त कर दिया था। राज्य में यह पहला मौका था, जब तीन सीनियर आईपीएस अफसरों डिमोट किया गया है। तीनों को आचार संहिता लागू होने से पहले ही एडीजी से डीजी के पद पर प्रमोट किया गया था। इससे पहले आईपीएस एसके पासवान को केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिलने पर डिमोट किया गया था।
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इसलिए सरकार को लेना पड़ा निर्णय
बता दें, केंद्र सरकार से सहमति ना मिलने के बाद पूर्ववर्ती कांग्रेस सकार ने तीनों आईपीएस अफसर को पदावनत करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने इस निर्णय के बाद आईपीएस अफसर संजय पिल्ले व आरके विज को प्रमोशन दे दिया था। दस्तोवजों से पदावनत संबंधी आदेश डिलीट नहीं हो पाया था। राज्य सरकार के बुधवार के इस निर्णय से अब इन दोनों पूर्व आईपीएस अफसरों के नाम सरकार दस्तावेजों में डिमोशन को डिलीट कर दिया जाएगा।
फायदे में रहेंगे पूर्व आईपीएस मुकेश गुप्ता
राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सबसे ज्यादा विपरीत परिस्थिति में पूर्वआईपीएस अफसर मुकेश गुप्ता रहे। राज्य सरकार के निर्देश पर एफआईआर दर्ज किया गया। एक ऐसा भी समय आया जब उनको छत्तीसगढ़ से बाहर रहना पड़ा। विवादों और एफआईआर व मामले मुकदमे के चलते एडीजी के पद से रिटायर होना पड़ा। राज्य सरकार के आज के निर्णय से उनको राहत मिलेगी। डिमोशन रद्द होने से पूर्व डीजीपी का ओहदा मिला। इसके लिए पेंशन व ग्रेज्युटी सहित अन्य लाभ भी मिलेगा।


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